नेताओं ने कहा- प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधा हमला पार्टी के हित में नहीं, इससे यह संदेश जाता कि पार्षद अपनी ही सरकार के खिलाफ
ग्वालियर। नगर निगम परिषद में भाजपा पार्षदों द्वारा धरना प्रदर्शन और हंगामा कर अधिकारियों पर हमले से भाजपा संगठन चिंतित है। मुखर्जी भवन में आयोजित भाजपा पार्षद दल की बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष अभय चौधरी और कमल माखीजानी ने पार्टी पार्षदों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि परिषद के भीतर और सार्वजनिक रूप से किए जा रहे धरना-प्रदर्शन से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि परिषद के भीतर प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधा हमला पार्टी के हित में नहीं है।
संगठन ने कहा कि विपक्ष कांग्रेस को घेरना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलना। नेताओं ने पार्षदों से अपील की कि वे अपने वार्डों की समस्याओं पर गंभीरता से काम करें। संगठन का मानना है कि यदि पार्षद अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करें, तो शहर की तस्वीर अपने आप बदल सकती है। पूरे शहर के लिए सांसद व मंत्री हैं।बैठक में महामंत्री राजू पलैया, नेता प्रतिपक्ष हरिपाल, महामंत्री विनोद शर्मा, अनिल सांखला, मंजू लता, जितेंद्र कुशवाह, मोहित जाट, सोनू त्रिपाठी, देवेंद्र राठौर, अनिल त्रिपाठी मौजूद रहे।
निगरानी समिति गठित, परिषद से पहले होगी रणनीतिक बैठक
पार्टी ने अनुशासन बनाए रखने और परिषद की कार्यवाही को सुचारू ढंग से चलाने के लिए पूर्व महापौर विवेक नारायण शेजवलकर की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन किया है। इसमें वर्तमान जिलाध्यक्ष राजौरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष अभय चौधरी और कमल माखीजानी को सदस्य बनाया गया है, जबकि पदेन अध्यक्ष भी इसमें शामिल रहेंगे। यह समिति केवल पार्षदों का मार्गदर्शन ही नहीं करेगी, बल्कि हर परिषद बैठक से पहले पार्षदों के साथ बैठक कर यह तय करेगी कि किन मुद्दों को, किस तरीके से और किस भाषा में सदन में उठाया जाए।
पार्षद ब्रजेश श्रीवास के धरने से नाराज संगठन
दरअसल, सोमवार को पार्षद ब्रजेश श्रीवास द्वारा दिए गए धरने और समझाने के बावजूद उसे समाप्त न करने से संगठन नाराज है। इसी के बाद जिलाध्यक्ष ने पार्षदों को चर्चा का भरोसा दिलाते हुए बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कहा कि असहमति दर्ज कराने का तरीका धरना नहीं, बल्कि पार्टी और संगठन के माध्यम से मुद्दों को उठाना है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था शासन स्तर पर तय होती है। इस पर पार्षद ब्रजेश श्रीवास द्वारा निगमायुक्त के अधिकार को लेकर उठाए गए सवालों पर संगठन ने साफ कहा कि यदि कहीं गंभीर अनियमितता है, तो उसका समाधान धरना-प्रदर्शन नहीं, बल्कि लिखित शिकायत के माध्यम से किया जाए। संगठन ने कहा कि परिषद में धरना देने से यह संदेश जाता है कि पार्टी पार्षद अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हैं, जो राजनीतिक रूप से गलत और नुकसानदायक है। बैठक में पदेन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट की गई।
गोसेवा पर समझौता नहीं
गोशालाओं से जुड़े मामलों में भी संगठन ने सख्त रुख दिखाया। नेताओं ने कहा कि पार्टी की नीति में गोसेवा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में गोवंश के चारे और खाद्य सामग्री की खरीदी में अड़चन डालना गलत संदेश देता है। संगठन ने पार्षदों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस तरह के मामलों में विरोध नहीं, बल्कि सहयोग की भूमिका निभाई जाए।