ग्वालियर

आने वाली गेहूं की 14 नई किस्में…शरीर में नहीं होगी ‘जिंक-आयरन’-‘प्रोटीन’ की कमी

MP News: गेहूं की 14 किस्में जो अगले वर्ष तक किसानों के बीच आने वाली है। उन किस्मों में जिंक, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में उपलब्ध होगा।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 64 वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी का समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यशाला के समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली में सहायक महानिदेशक (एफएफसी) डॉ. एसके प्रधान ने की और सह-अध्यक्षता भारतीय गेंहू एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने की।

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पोषक तत्वों से भरपूर

इस अवसर पर उन्होंने गेहूं व जौ की 18 किस्मों के बारे में बताते हुए कहा, यह किस्में अगले वर्ष तक किसानों को उपलब्ध करा दी जाएगी। इनमें गेहूं की वे किस्में शामिल हैं। जिनमें आयरन, जिंक और प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होगा। जौ की 4 किस्में है जो उत्पादन के साथ साथ पोषक तत्वों से भरपूर हैं।

इसमें खास बात यह है कि जौ की डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म छिक्ल रहित है। जिसका प्रयोग गेहूं में मिलाकर खाने में किया जा सकता है। उन्होंने इस वर्ष हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलिब्धयों गेहूं के रिकॉर्ड 117.5 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्पादन पर सभी अनुसंधानकर्ता को बधाई दी।

अगले वर्ष होगी उपलब्ध

गेहूं की 14 किस्में जो अगले वर्ष तक किसानों के बीच आने वाली है। उन किस्मों में जिंक, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में उपलब्ध होगा। जिंक और आयरन 45 पीपीएम एवं प्रोटीन 13.5 प्रतिशत उपलब्धता होगी। जिससे भोजन में आयरन, जिंक और प्रोटीन की कमी को पूरा किया जा सकेगा। गोष्ठी के तीसरे दिन पहले सत्र में वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए कई प्रस्तुतिकरण हुए।

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयोगी

एनआईएडब्ल्यू-4114 (ए आर एस निफाड), डब्ल्यूएच-1306 (हिसार), केबी-2031(कानपुर), यूपीबी-1106 (पंतनगर), एचआई-1669, एचआई-1674, एचआई-1665, एचआई-8840 (आईएआरआई, इंदौर), एचडी-3428 (आईएआरआई, नईदिल्ली), डीबीडब्ल्यू-386, डीबीडब्ल्यू-443 (आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल- गेंहू), डीडब्ल्यूआरबी-219, डीडब्ल्यूआरबी-223 (आईआईडब्ल्यूबीआर,करनाल-जौ),लोक-79(लोकभारती सनोसारा), एनडब्ल्यूएस-2222 (नुजिवीडु सीड्स), पीबीडब्ल्यू-891 (लुधियाना), एकेएडब्ल्यू-5100 (अकोला), जीडब्ल्यू-543 (विजापुर) की किस्में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटका, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उदयपुर, बुन्देलखण्ड, बिहार, बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र के लिए यह उपयोगी साबित होगीं।

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Updated on:
28 Aug 2025 03:12 pm
Published on:
28 Aug 2025 01:43 pm
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