
Gwalior news: एमपी में ग्वालियर शहर के तीन लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को इस माह में मिलने वाले बिजली बिल में अतिरिक्त भुगतान करना होगा। प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (एफसीपीपीए) सरचार्ज को 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया है। यानी उपभोक्ताओं पर पहले की तुलना में 2.66 प्रतिशत अधिक सरचार्ज का बोझ पड़ेगा। बिजली कंपनियों का कहना है कि ईधन की बढ़ती कीमत, महंगी बिजली खरीद और जलविद्युत उत्पादन में कमी के कारण यह फैसला लिया गया है।
प्रदेश में इस बार सामान्य से कम बारिश होने से जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है, जिससे बिजली परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। उत्पादन घटने के कारण बिजली कंपनियों को खुले बाजार से अपेक्षाकृत महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है, जहां कई स्थानों पर रात के समय अघोषित कटौती की शिकायतें सामने आ रही है।
एफसीपीपीए वह परिवर्ती शुल्क है, जिसे बिजली उत्पादन में ईंधन लागत और बिजली खरीद की वास्तविक लागत में होने वाले बदलाव के आधार पर समय-समय पर उपभोक्ताओं के बिल में जोड़ा और घटाया जाता है। यह मूल बिजली दर (टैरिफ) से अलग होता है।
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जुलाई-2026 के लिए एफसीपीपीए सरचार्ज 3.77 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह प्रावधान विद्युत आपूर्ति एवं व्हीलिंग टैरिफ विनियम-2021 के तहत लागू किया गया है और 24 जुलाई 2026 से उपभोक्ताओं के ऊर्जा शुल्क (एनर्जी चार्ज) पर वसूला जा रहा है।
नई दरों के अनुसार 200 से 300 यूनिट मासिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगभग 35 से 87 रुपये तक अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है। अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव और अधिक होगा।
-स्मार्ट मीटर लगा है तो उपाय एप पर स्मार्ट मीटर ऑप्शन पर अपने घर की रियल टाइम खपत और माह में संभावित खपत पर ध्यान रखिए। कोशिश करें ये 150 यूनिट तक रहे, ताकि छूट का पूरा लाभ मिल सके।
-रात की छूट खत्म होने के बाद अब दिन में सुबह 09 बजे से शाम 05 बजे तक अपने बिजली से जुड़े घरेलू काम निपटाएं। बिजली की फिजूलखर्ची बंद करेंगे तो छूट का अधिकतम लाभ ले सकते हैं।
-सुरक्षा निधि की गणना आपके पूरे साल की बिजली खपत का 45 दिनी औसत निकाला जाता है। कम खपत होगी तो संभव है सुरक्षा निधि घटे और अगले साल बिल में असर दिखे।