
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए गांव में पहुंचा राजस्व और पंचायत अमला
ग्वालियर. स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनकी पुश्तैनी आबादी भूमि और मकानों का वैध मालिकाना हक दिलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने पंजीयन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। प्रदेशभर में पटवारियों द्वारा रजिस्ट्री कार्य के बहिष्कार के कारण प्रभावित हो रही प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अब तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (आरआइ) और पंचायत समन्वय अधिकारियों को उप पंजीयक के विधिक अधिकार दिए गए हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक के प्रस्ताव पर वाणिज्यिक कर विभाग ने यह वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है।
शासन के निर्णय के बाद शनिवार से ग्वालियर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व और पंचायत अमले ने गांवों में पहुंचकर काम शुरू कर दिया। ग्राम समूदन, चिरूली, मसूदपुर, टिकटौली, बाजना, भगेह, रिछारीकला और सुपाट सहित कई गांवों में सचिवों, रोजगार सहायकों और स्थानीय युवाओं की मदद से हितग्राहियों की ई-केवाईसी कराई जा रही है। जिले में कुल 69,900 ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य है। इसके लिए गांव-गांव पहुंचकर दस्तावेज और हितग्राहियों से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस रखा गया है। नए अधिकृत उप पंजीयक संपदा मोबाइल ऐप के माध्यम से हस्तांतरण विलेखों का ऑनलाइन अवलोकन और अनुमोदन करेंगे। इससे दस्तावेजों के पंजीयन के लिए ग्रामीणों को बार-बार रजिस्ट्री कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी।
दस्तावेज निष्पादन की प्रक्रिया में वीडियो केवाईसी और आधार आधारित ई-साइन का उपयोग किया जाएगा। यानी हितग्राही की पहचान और सहमति की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा मिल सकेगी और समय भी कम होगा।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराना है। संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार होने से ग्रामीणों को मालिकाना हक का प्रमाण मिलता है।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत पंजीयन अधिकारियों की भूमिका दस्तावेजों के विधिवत पंजीयन तक सीमित है। उन्हें स्वत्व का न्यायिक निर्धारण नहीं करना होता। इसी आधार पर सरकार ने पंजीयन कार्य के लिए अन्य अधिकारियों को वैधानिक अधिकार दिए हैं।
स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से पटवारियों के पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। उनका कहना है कि भविष्य में आबादी भूमि को लेकर विवाद होने पर व्यक्तिगत कानूनी दायित्व और मुकदमे का जोखिम हो सकता है। पटवारियों ने रजिस्ट्री कार्य को अपने मूल राजस्व सेवा दायित्वों से अलग होने का तर्क भी दिया है। इसके अलावा आबादी भूमि के सीमांकन में तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि और अतिरिक्त काम के दबाव को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी। सरकार ने अब वैकल्पिक अधिकारियों को अधिकार देकर लंबित पंजीयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
Updated on:
20 Sept 2026 06:43 pm
Published on:
20 Sept 2026 06:37 pm
