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2000 पार यूपीआइ पर शुल्क की आहट: बाजार में लौटने लगा कैश, छोटे नोटों के संकट के बीच ग्राहकों की बढ़ेगी आफत

देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाले यूपीआइ पर शुल्क की आहट ने लागू होने से पहले ही बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। 2,000 रुपए से अधिक के व्यावसायिक यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के विरोध में व्यापारियों ने बड़े डिजिटल भुगतान स्वीकारने से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं।
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यूपीआइ पर शुल्क

यूपीआइ पर शुल्क

ग्वालियर. देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाले यूपीआइ पर शुल्क की आहट ने लागू होने से पहले ही बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। 2,000 रुपए से अधिक के व्यावसायिक यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के विरोध में व्यापारियों ने बड़े डिजिटल भुगतान स्वीकारने से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। काउंटर पर अब नकद, चेक और आरटीजीएस का सहारा लिया जा रहा है।

75-80त्न व्यापार डिजिटल, अब बड़े लेनदेन पर लगा ब्रेक…
थोक और खुदरा बाजारों में करीब 75 से 80 फीसदी रोजमर्रा का लेन-देन यूपीआइ से हो रहा था। इससे छुट्टे पैसों की समस्या दूर होने के साथ कारोबार में पारदर्शिता आई। प्रस्तावित शुल्क ने किराना, कपड़ा, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कम मार्जिन वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। उनका तर्क है कि शुल्क सीधे मुनाफे को प्रभावित करेगा।

85.4त्न बड़े नोट, बाजार से चिल्लर गायब
यूपीआइ से दूरी के बीच नकदी का संकट भी परेशानी बढ़ा रहा है। बाजार में मौजूद कुल करेंसी वैल्यू में 500 और 100 रुपए के नोटों की हिस्सेदारी 85.4 फीसदी है, जबकि 5, 10, 20, 50 और 200 रुपए के नोट महज 14.6 फीसदी हैं। बैंकों में छोटे नोटों की नई गड्डियां भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

विरोध शुरू
बाजार में कई दुकानदारों ने यूपीआइ पर टैक्स का विरोध क्यूआर कोड पर कपड़ा ढंककर शुरू कर दिया है।

23 सितंबर को नो यूपीआइ डे, स्कैनर पर डालेंगे काला कपड़ा
मध्यप्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की कार्यकारिणी बैठक शनिवार की शाम संपन्न हुई। इस बैठक में यूपीआइ लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी एमडीआर विरोध स्वरूप निकलकर सामने आया। बैठक में आव्हान किया गया कि एमडीआर के विरोध में 23 सितंबर को नो यूपीआइ डे यानी किसी भी तरह से यूपीआइ लेनदेन नहीं करेंगे। इसके साथ ही यूपीआइ स्कैनर को काले कपड़े से ढं$केंगे। चैंबर ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर 2000 रुपए से अधिक के यूपीआइ लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी एमडीआर को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

बड़े लेनदेन के लिए यूपीआइ के स्थान पर चेक और आरटीजीएस लेना शुरू कर दिया है। अतिरिक्त शुल्क सीधे व्यापारी के मुनाफे पर पड़ रहा है।"
श्याम कुमार बंसल 'अप्पा', गल्ला-किराना कारोबारी, दाल बाजार
2,000 से ऊपर की खरीदारी पर ग्राहकों से नकद का आग्रह कर रहे हैं। दिक्कत यह है कि बाजार में 10, 20, 50 और 200 के नोट आसानी से नहीं मिल रहे।"
पंकज अग्रवाल, जनरल स्टोर कारोबारी, ग्वालियर