
मुरैना। जो लोग दो अप्रैल को भारत बंद में शामिल हुए, वे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान के दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने ही संविधान में लिखा है कि न्यायालय के फैसले का विरोध सड़कों पर नहीं किया जाना चाहिए। यह बात बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूल सिंह बरैया ने शहर के प्रेमनगर में अजा वर्ग के लोगों से मुलाकात के दौरान कही।
फूल सिंह बरैया ने कहा कि अधिकांश लोग भारत बंद में बिना सोचे-समझे शामिल हुए। किसी को अब तक यह नहीं पता कि आखिर बंद का आह्वान किया किसने था। जब हमें कुछ पता ही नहीं तो अंधेरे कुएं में कूदना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब को हमने देखा नहीं है तो वे जो संविधान में लिखकर गए हैं, उसे पढ़कर मानना चाहिए, लेकिन उनका लिखा हुआ न मानकर हमने उनका अनादर किया है।
बरैया ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले से हम असहमत हैं तो संवैधानिक ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। यह हक भी डॉ. अंबेडकर ने हमें प्रदान किया है। उन्होंने अजा-अजजा वर्ग के लोगों को वे सभी अधिकार दिए, जिनसे वे वर्षों तक वंचित थे, लेकिन उन्होंने इसके लिए कलम की ताकत का इस्तेमाल करने को कहा था, डंडे का बल प्रयोग करने के लिए नहीं। इस दौरान बहुजन संघर्ष दल के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों सहित युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष जसवीर सिंह गुर्जर, जिलाध्यक्ष श्यामवीर सिंह सोलंकी भी मौजूद रहे।
सबसे पहले बसंद आया आगे
फूलङ्क्षसह बरैया ने कहा कि अजा-अजजा एक्ट में संशोधन के फैसले पर असहमति जताते हुए बहुजन संघर्ष दल ने सबसे पहले ज्ञापन दिया। इसके बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में ही एक रिटी भी दायर की है। यह काम किसी और पार्टी की तरफ से नहीं किया गया। यदि दूसरी पार्टियां भी रिट दायर करतीं तो हमारी बात का वजन बढ़ जाता। बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने शहर के पीपरीपुरा में भी इसी तरह की बैठक में लोगों से मुलाकात की।