प्रदेश सरकार का मंत्री ही जब भगोड़ा हो जाए तो फिर प्रशासन के बारे में क्या कह सकते हैं?
ग्वालियर। प्रदेश सरकार का मंत्री ही जब भगोड़ा हो जाए तो फिर प्रशासन के बारे में क्या कह सकते हैं? यह बड़ी अजीब बात है कि अदालत ने मंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है और सरकार उसे ढूंढ नहीं पा रही। संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री को कोर्ट में हाजिर होकर उदाहरण पेश करना चाहिए था। यह बात पूर्व महाधिवक्ता एवं सांसद विवेक तन्खा ने गुरुवार को हाईकोर्ट परिसर में मीडिया से चर्चा में कही।
वे माखनलाल जाटव हत्याकांड में मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ कोर्ट से जारी वारंट के संबंध में बात कर रहे थे। तन्खा ने कहा मंत्री ने वारंट पर स्थगन आदेश नहीं लिया गया है तो उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए। यह मंत्री के लिए इसलिए अनिवार्य है क्योंकि वे संवैधानिक पद पर हैं। यदि इस पद पर बैठे लोगों का आचरण ही खराब होगा तो वे लोगों के सामने क्या उदाहरण पेश कर सकेंगे। तन्खा ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि वे नहीं मिल रहे हैं। इससे प्रशासन की ही नहीं सरकार की छवि भी खराब होती है। सरकार को पूरा प्रयास कर उन्हें ढूंढकर अदालत में पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है और न्यायालय प्रकरण को आगे बढ़ाना चाहता है तो आरोपी की उपस्थिति के लिए वारंट जारी किया जाता है। यह न्यायिक प्रक्रिया है इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। मंत्री और अधिकारी ही न्यायालय का सहयोग नहीं करेंगे तो कौन करेगा?
सिंधिया को सीएम देखना चाहता हूं
तन्खा ने कहा कि वे और प्रदेश के लोग पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, लेकिन सीएम पद का प्रत्याशी घोषित करने का काम पार्टी हाईकमान का है। तन्खा यहां विदिशा के सम्राट अशोक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग कॉलेज की सोसाइटी के चुनाव को चुनौती देने के मामले में सुनवाई के लिए आए थे। गुरुवार को बहस पूरी नहीं हो सकी। अब ९ जनवरी को सुनवाई होगी।