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शिवराज सरकार के कद्दावर मंत्री लाल सिंह को हाईकोर्ट से नहीं मिली अग्रिम जमानत

कांग्रेस के विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड में आरोपी प्रदेश के मंत्री लाल सिंह आर्य के अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया
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ग्वालियर

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monu sahu

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Updated: 15 Nov 2017, 7:35 PM IST

high court

lal singh arya

ग्वालियर। कांग्रेस के विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड में आरोपी प्रदेश के मंत्री लाल सिंह आर्य के अग्रिम जमानत आवेदन को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति शील नागू ने आर्य के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में गवाहों द्वारा दिए बयानों से यह शीशे की तरह साफ है कि लाल सिंह आर्य घटना के समय मौजूद था। उन्होंने ही गोली चलाने को कहा था जिस पर आरोपियों ने गोली मार कर माखनलाल की हत्या कर दी थी।

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न्यायाधीश शील नागू ने कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया देखने से यह स्पष्ट होता है कि माखनलाल जाटव की हत्या के मामले में गवाहों के आधार पर हत्या के गंभीर अपराध में माखनलाल आर्य की संलग्नता को पाया है उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के लिए काफी है। इन तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण मामला दर्ज कराया गया है।

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इन तथ्यों को नकारा नहीं जा सकता है। लिहाजा अपीलार्थी लाल सिंह आर्य के अग्रिम जमानत के आवेदन को खारिज किया जाता है। इस मामले में सीबीआई की ओर से असिस्टेंट सोलिसीटर जनरल विवेक खेड़कर तथा शासकीय अधिवक्ता बीके शर्मा ने पैरवी की।

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इस तरह चला घटनाक्रम
लाल सिंह आर्य द्वारा उच्च न्यायालय में यह कहते हुए अग्रिम जमानत के लिए याचिका प्रस्तुत की थी कि उन्हें न तो मध्यप्रदेश शासन की एजेंसी ने और न ही केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा माखनलाल की हत्या में आरोपी बनाया है। इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दिया जाना उचित होगा।

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विचारण न्यायालय द्वारा सूर्यभान सिंह गुर्जर तथा रणवीर सिंह जाटव जो की माखनलाल का पुत्र है व शीला जाटव जो की माखनलाल की पत्नी है के बयानों के आधार पर लाल सिंह को धारा ३१९ के तहत आरोपी बनाया गया। विचारण न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ लाल सिंह ने उच्च न्यायालय में अपील प्रस्तुत की थी जिस पर उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को बदलते हुए आदेश दिया था कि लाल सिंह को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

किंतु अपीलार्थी द्वारा उक्त आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा २४ जुलाई १७ को यह आदेश दिया कि इस मामले में आरोपी को या अपीलार्थी को पार्टी बनाया जाना और सुना जाना आवश्यक नहीं है। लिहाजा उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लाल सिंह को आरोपी बनाए जाने के आदेश को यथावत रखा गया है। इस मामले में लाल सिंह की इस हत्याकांड में संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट होने से उनहें अग्रिम जमानत की पात्रता नहीं है।