
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: गलत काम करने वालों को फायदा पहुंचाने अफसरों की खदान संचालकों से मिलीभगत
ग्वालियर. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बिलौआ की खदानों से उत्खनन और ट्रकों में ओवरलोङ्क्षडग के मामले में टिप्पणी की है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ओर शासन कह रहा है कि क्रशर क्षेत्रों में धर्मकांटा लगे हैं, लेकिन ओवरलोङ्क्षडग और अत्यधिक खनन के आरोपों के बावजूद अधिकारियों द्वारा उनका रिकॉर्ड जब्त न करना समझ से परे है। यह साफ दर्शाता है, अधिकारी अब भी खनन कारोबारियों के साथ साठगांठ में हैं और गलत लोगों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। दरअसल हाईकोर्ट में बिलौआ क्षेत्र में अवैध उत्खनन व परिवहन को लेकर जनहित याचिका लंबित है। शासन ने क्रशर पर तौल कांटा लगाने का सुझाव दिया है। क्रशरों पर कांटा लगा हुआ है, लेकिन उनकी जांच नहीं की गई।
पोर्टल से नहीं जुड़े थे धर्मकांटे, कोर्ट ने पूछा- रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की?
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक खेडकऱ ने पक्ष रखते हुए बताया कि सभी खदान संचालकों ने अपने क्रशर क्षेत्र के निकास द्वार पर कांटा लगा रखा था, हालांकि इनमें से कोई भी आधिकारिक पोर्टल से ङ्क्षलक या इंटीग्रेटेड नहीं था। इस पर अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि जब मुख्य आरोप ही अत्यधिक उत्खनन और ट्रकों में ओवरलोङ्क्षडग का है, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने इन धर्मकांटों का रिकॉर्ड जब्त क्यों नहीं किया? हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को इस संबंध में स्पष्ट और विशिष्ट जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
कलेक्टर से इन बिंदुओं पर मांगा जवाब
<कोर्ट ने कहा, मामले का मूल विवाद लंबित कारण बताओ नोटिसों को लेकर है। कलेक्टर को निर्देशित किया कि वे रोजाना सुनवाई कर एक माह में अंतिम निराकरण करें।
<याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कई खदान संचालकों पर आरआरसी जारी होने के बाद भी वे खनन कर रहे हैं और वसूली नहीं की गई। कोर्ट ने कलेक्टर को जारी सभी आरआरसी का ब्योरा और उन्हें निष्पादित करने की तय समय सीमा पेश करने के निर्देश दिए।
Updated on:
25 Oct 2026, 2:09 AM IST
Published on:
25 Oct 2026, 2:09 AM IST
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