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पार्किंग पर कारोबारियों का कब्जा, सड़कों पर ग्राहकों का जाम, त्योहार में कैसे मिलेगी राहत?

त्योहार की खरीदारी शुरू होते ही शहर के बाजारों में यातायात व्यवस्था चरमराने लगी है। करवाचौथ की खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ से सड़कें छोटी पड़ रही हैं। मुख्य बाजारों में वाहन रेंग रहे हैं और पैदल चलने वालों को भी भीड़ के बीच रास्ता तलाशना पड़ रहा है। अभी धनतेरस और दीपावली की खरीदारी बाकी है, ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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ग्वालियर

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Rahul Thakur

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Updated: 24 Oct 2026, 6:09 PM IST

यातायात व्यवस्था

यातायात व्यवस्था

ग्वालियर. त्योहार की खरीदारी शुरू होते ही शहर के बाजारों में यातायात व्यवस्था चरमराने लगी है। करवाचौथ की खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ से सड़कें छोटी पड़ रही हैं। मुख्य बाजारों में वाहन रेंग रहे हैं और पैदल चलने वालों को भी भीड़ के बीच रास्ता तलाशना पड़ रहा है। अभी धनतेरस और दीपावली की खरीदारी बाकी है, ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस ने त्योहार पर जाम से निपटने और यातायात सुचारु रखने का भरोसा दिलाया है, लेकिन बाजारों में फिलहाल इसका असर नजर नहीं आ रहा। जाम की बड़ी वजह पार्किंग की अव्यवस्था है। बाजारों में मौजूद पार्किंग स्थलों पर व्यापारियों, कर्मचारियों और फुटपाथ कारोबारियों के वाहन खड़े रहते हैं। ऐसे में खरीदारी करने आने वाले ग्राहक सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर होते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई घटती है और जाम लग जाता है। दूसरी ओर व्यापारियों की मांग है कि बाजारों में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद नहीं किया जाए, क्योंकि इससे ग्राहक बाजार आने से कतराएंगे। इस खींचतान के बीच आम खरीदार जाम में फंस रहा है।

हर बाजार में अलग परेशानी
महाराज बाड़ा:
गोरखी गेट, टाउन हॉल और भूगर्भ विज्ञान संग्रहालय के सामने पार्किंग है, लेकिन यहां व्यापारियों, कर्मचारियों और फुटपाथ कारोबारियों के वाहन भी खड़े रहते हैं।
टोपी बाजार: मुख्य रास्ते के बीच कारोबारियों के वाहन खड़े होने से सड़क पर आवागमन प्रभावित होता है।
सराफा बाजार: सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े रहते हैं। कारोबारियों और कर्मचारियों के वाहन सुबह से रात तक जगह घेरे रहते हैं।

सुबह से रात तक बढ़ रहा यातायात का दबाव
आम दिनों में सुबह 9.45 से 10.55 बजे तक कार्यालयों के समय वाहनों का दबाव अधिक रहता है। इसके बाद सुबह 11.30 से शाम 5 बजे तक यातायात अपेक्षाकृत कम होता है। शाम 5.30 से रात 10 बजे तक फिर भीड़ बढ़ जाती है। त्योहारी सीजन में सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक बाजारों में लगातार वाहनों की आवाजाही चुनौती बनी हुई है।

आदेश के बाद भी ई-रिक्शा का जमावड़ा
महाराज बाड़ा, गांधी गोलंबर और सराफा बाजार में ई-रिक्शा चालकों ने अघोषित स्टैंड बना रखे हैं। गांधी गोलंबर पर सवारी उतारकर आगे बढ़ने के निर्देश हैं। निगरानी के लिए पुलिसकर्मी भी तैनात हैं, इसके बावजूद ई-रिक्शा और ऑटो खड़े रहते हैं। सराफा बाजार में भी बिना रुके निकलने का आदेश बेअसर नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल है कि त्योहार के दौरान जाम से निपटने के लिए बनाई गई व्यवस्था जमीन पर कब उतरेगी?