
लड़के-लड़कियों ने एक साथ खेला क्रिकेट (फोटो सोर्स: Patrika)
Rajgarh News : क्रिकेट के मैदान पर अक्सर लड़कों की टीम और लड़कियों की टीम अलग-अलग नजर आती है, लेकिन मध्य प्रदेश के राजगढ़ में नजर आई तस्वीर कुछ अलग थी। यहां लड़कियां भी लड़कों के साथ मैदान में उतरीं, टीम का हिस्सा बनीं और पूरे उत्साह के साथ दोनों टीमों ने क्रिकेट खेला। ये मुकाबला सिर्फ बल्ले और गेंद तक सीमित नहीं था, बल्कि उस सोच को चुनौती देने की पहल भी था, जिसमें खेल के अवसरों को लड़के और लड़कियों के बीच अलग-अलग देखा जाता है। मैदान पर साथ खेलते युवा-युवतियों ने समानता, सहयोग और भाईचारे का संदेश दिया।
लड़कियों के लिए यह अनुभव खास था। उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने का अवसर मिला। साथ खेलने से उन्हें समानता और आपसी भाईचारे का अनुभव हुआ। यह पहल अहिंसा वेलफेयर सोसायटी की ओर से आयोजित समावेशी क्रिकेट मैच के दौरान देखने को मिली। जिले के 20 गांवों से आए 40 से अधिक युवा-युवतियां राजगढ़ के स्टेडियम में एकत्रित हुए और मिलकर क्रिकेट खेला। आयोजन का उद्देश्य खेल के माध्यम से लड़के-लड़कियों के बीच समान अवसर, आपसी सहयोग और सहभागिता की भावना को बढ़ावा देना था।
गांवों में आमतौर पर खेल गतिविधियों में लड़कों की भागीदारी अधिक दिखाई देती है। कई बार लड़कियों को ऐसे मौकेर नहीं मिलते, जहां वे बिना किसी भेदभाव के खेल में हिस्सा लें। ऐसे में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने का मौका लड़कियों के लिए नया और उत्साह बढ़ाने वाला अनुभव रहा। उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ टीम भावना से खेल में भागीदारी की और एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया। इस साझेदारी ने ये संदेश दिया कि, मौका मिलने पर लड़कियां भी पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर सकती हैं।
मैच में शामिल युवक-युवतियां अहिंसा वेलफेयर सोसायटी से जुड़कर अपने गांवों में सामाजिक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं। वे संवैधानिक मूल्यों- समानता, स्वतंत्रता, न्याय और भाईचारे की समझ विकसित करने तथा समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों से जुड़े हैं। आयोजन में 20 पूर्व पीस वॉलंटियर और 20 वर्तमान पीस वॉलंटियर शामिल हुए। अलग-अलग गांवों से आए इन युवाओं ने खेल के माध्यम से आपसी संवाद, सहयोग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया।
आयोजन ने दिखाया कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत साझा अवसरों से भी हो सकती है। जब लड़के और लड़कियां साथ खेलते हैं, एक-दूसरे का सहयोग करते हैं और बराबरी से भागीदारी निभाते हैं, तो भेदभावपूर्ण धारणाओं को चुनौती देने का अवसर बनता है। यह पहल युवाओं को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने और गांवों में समानता व भाईचारे की समझ विकसित करने की दिशा में एक प्रयास रही।
Updated on:
24 Oct 2026, 5:04 PM IST
Published on:
24 Oct 2026, 5:04 PM IST
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