
राजगढ़ में अनोखा नवाचार (फोटो सोर्स: Patrika)
राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ में मां दुर्गा की झांकियों में 9 दिन तक चढ़ीं फूल-मालाएं अब अगले नवरात्र में फिर पूजा के काम आएंगी। राजगढ़ में इस बार झांकियों से उतरी फूल-मालाओं को कचरे में फेंकने या नदी में बहाने के बजाय सहेजकर उनसे धूप-बत्ती सहित पूजन सामग्री तैयार करने की पहल की गई है। खास बात ये है कि, तैयार सामग्री अगले साल उन्हीं दुर्गा उत्सव समितियों को नि:शुल्क दी जाएगी, जहां से ये फूल एकत्र किए गए थे। इससे धार्मिक आस्था से जुड़ी सामग्री का दोबारा उपयोग होगा, पर्यावरण को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी और समितियों को पूजन सामग्री पर अलग से खर्च भी नहीं करना पड़ेगा।
नवरात्रि के दौरान शहर की बड़ी दुर्गा झांकियों से प्रतिदिन फूल-मालाएं एकत्र की गईं। नौ दिन में कुल 520 किलो फूल-मालाएं जुटाई गईं। इनमें शीतला मंदिर की झांकी से प्रतिदिन करीब 50 किलो फूल मिले। इन फूलों से धागे और चमकीली पन्नियां अलग कर उन्हें सोलर ड्रायर से सुखाया गया। अब इनका उपयोग धूप-बत्ती और अन्य पूजन सामग्री बनाने में किया जाएगा। फूलों को सोलर ड्राइ कर, पूजा के अग्नि होत्र (गाय के गोबर के कंडों) बनाने का कार्य किया, जो भविष्य में स्व-सहायता समूह को रोजगार के नये अवसर बनाने व नदी के इको सिस्टम को बचाने का अभिनव कार्य किया है।
इस पहल की खास बात केवल फूलों का संग्रह करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा पूजा के योग्य उपयोग में लाना है। जिन समितियों की झांकियों से फूल-मालाएं एकत्र की गईं, अगले नवरात्र में उन्हीं समितियों को इनसे तैयार पूजन सामग्री नि:शुल्क देने की योजना है। इससे समितियों को पूजा के लिए सामग्री खरीदने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में राहत मिलेगी। साथ ही, पूजा के बाद फूलों के निस्तारण की समस्या का भी बेहतर विकल्प तैयार होगा।
डिप्टी कलेक्टर और नगर पालिका राजगढ़ की प्रभारी निधि भारद्वाज के मार्गदर्शन में पर्यावरण सुधार संगठन ने जिला प्रशासन और हिंदू उत्सव समिति के सहयोग से यह पहल की। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष हर्षांत इंग्ले और समाजसेवी मनोज सेंगर ने भी इस नवाचार में भूमिका निभाई। इंग्ले का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पूजा के बाद फूल-मालाओं को नदी में बहाने से रोकना, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना और धार्मिक आयोजनों में पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था को बढ़ावा देना है। भविष्य में इस काम को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार के अवसर विकसित करेंगे।
Updated on:
22 Oct 2026, 7:53 PM IST
Published on:
22 Oct 2026, 7:22 PM IST
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