ग्वालियर

बड़ी कार्रवाई…सरकारी कॉलेजों से हटाए जाएंगे ‘गेस्ट लेक्चरर’, हाईकोर्ट ने दिया था फैसला

MP News: हाईकोर्ट के फैसले के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने यूजीसी मानकों पर सख्ती शुरू कर दी है। न्यूनतम योग्यता से वंचित अतिथि विद्वानों का आवंटन निरस्त होगा। इससे कॉलेजों में बड़ा प्रशासनिक और शैक्षणिक भूचाल तय है।

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Jan 19, 2026
Guest Lecturers removal from government colleges (फोटो- AI)

Guest Lecturers removal: शासकीय कॉलेजों (Government Colleges) में वर्षों से कार्यरत अतिथि विद्वानों पर अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए है, जिसके तहत न्यूनतम अर्हता पूरी नहीं करने वाले अतिथि विद्वानों का आवंटन तत्काल निरस्त किया जाएगा।

यह कार्रवाई खासतौर पर उन अतिथि विद्वानों पर लागू होगी, जो नियमित प्राध्यापकों की पदस्थापना या स्थानांतरण के बाद भी फॉलन आउट की स्थिति में कॉलेजों में बने हुए है। विभाग ने इसे नियमों का सीधा उल्लंघन माना है। (MP News)

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हाईकोर्ट के फैसले के बाद

तेज हुई कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग का यह सख्त कदम हाईकोर्ट (Gwalior High Court) के निर्णय के बाद सामने आया है। इसके बाद विभाग ने सभी आयुक्तों, शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए है कि सभी अतिथि विद्वानों की योग्यता की जांच कराई जाए जो यूजीसी मानकों पर खरे नहीं उतरते उनका आवंटन तरंत निरस्त किया जाए। विभाग ने साफ कर दिया है कि इस प्रक्रिया में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने संकेत दे दिया है कि अब योग्यता नहीं, तो नियुक्ति नहीं का फार्मूला लागू होगा। फैसला लागू होते ही कॉलेजों में बड़ा फेरबदल तय है।

प्रभावित होने की आशंका

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, केवल पीजी या एमफिल के आधार पर कार्यरत अतिथि विद्वानों की संख्या सैकड़ों में है। यदि निर्देशों का सख्ती से पालन हुआ, तो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर आवंटन निरस्त होंगे कई कॉलेजों में अतिथि विद्वानों की संख्या अचानक घटेगी शिक्षण व्यवस्था पर भी इसका असर दिख सकता है।

प्रशासनिक कार्रवाई या शिक्षकों पर सीधा प्रहार

एक ओर विभाग इसे यूजीसी मानकों की अनिवार्यता रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि विद्वानों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? क्या नियमित पदों पर भर्ती तेज होगी या फिर कॉलेजों में पढ़ाई का बोझ और बढ़ेगा।

पीजी और एमफिल वाले होंगे बाहर

उच्च शिक्षा विभाग के आकलन के अनुसार प्रदेश के कई शासकीय कॉलेजों में ऐसे अतिथि विद्वान कार्यरत हैं जिनके पास केवल स्नातकोत्तर या एमफिल की योग्यता है। जबकि यूजीसी नियमों के अनुसार उच्च शिक्षा में अध्यापन के लिए नेट, सेट या पीएचडी अनिवार्य है। इन योग्यताओं के अभाव में लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों पर अब सीधी गाज गिरने वाली है। (MP News)

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Updated on:
19 Jan 2026 03:52 am
Published on:
19 Jan 2026 03:51 am
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