
झांसी रोड पर सड़क के नीचे बनी 10 फीट लंबी सुरंग, दो कारें फंसीं; हाईकोर्ट में 136 जलभराव पॉइंट सुधारने का दावा पहली ही बारिश में फेल
ग्वालियर। मानसून की पहली जोरदार बारिश ने ग्वालियर में विकास कार्यों की गुणवत्ता और नगर निगम की तैयारियों की कलई खोल दी। बुधवार को करीब तीन घंटे में हुई 2.07 इंच बारिश ने पूरे शहर को पानी-पानी कर दिया। सबसे चौंकाने वाली घटना झांसी रोड थाना के सामने हुई, जहां करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से बन रही व्हाइट टॉपिंग सड़क अचानक धंस गई। सड़क के नीचे करीब 10 फीट लंबी और चार फीट गहरी सुरंग बन गई, जिसमें दो कारें फंस गईं। स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर की मदद से दोनों वाहनों को बाहर निकाला, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बारिश का असर सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं रहा। शहर के करीब 400 स्थानों पर जलभराव हुआ, जबकि 150 से अधिक कॉलोनियां पानी में डूब गईं। कई इलाकों में सीवर उफन पड़े, सड़कें तालाब में बदल गईं और लोगों को घंटों जाम व जलभराव से जूझना पड़ा।
आधे घंटे तक कोई नहीं पहुंचा, फिर गिट्टी डालकर की खानापूर्ति
सड़क धंसने की घटना के करीब आधे घंटे बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। पहले दोनों ओर बैरिकेडिंग कर यातायात रोका गया, फिर गड्ढे में गिट्टी डालकर रोलर चलाया गया ताकि सड़क को अस्थायी रूप से यातायात योग्य बनाया जा सके। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के नीचे अब भी खोखलापन है और दोबारा धंसने का खतरा बना हुआ है।
पहले भी दो बार धंस चुकी थी सड़क
जानकारी के अनुसार व्हाइट टॉपिंग सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी करा रहा है, जबकि मिट्टी के कॉम्पेक्शन की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। यह सड़क पहले भी दो बार धंस चुकी थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने नगर निगम को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि कॉम्पेक्शन सही नहीं किया गया तो सड़क फिर धंस सकती है। इसके बावजूद स्थायी सुधार नहीं हुआ और पहली ही तेज बारिश में आशंका सच साबित हो गई।
सड़क धंसी या सीवर लाइन बैठी? विभागों में शुरू हुई जिम्मेदारी की जंग
घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय दोनों विभागों के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री महेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि सड़क नहीं धंसी, बल्कि करीब डेढ़ साल पहले डाली गई छह मीटर गहरी सीवर लाइन की ट्रेंच का 'नेचुरल सेटलमेंट' हुआ है। उनका कहना है कि लगातार बारिश से मिट्टी बैठ गई थी, जिसे गिट्टी डालकर फिर से मोटरेबल बना दिया गया है। हालांकि मौके की तस्वीरें इस दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं।
चेतकपुरी जैसी घटना फिर दोहराई
झांसी रोड की घटना ने चेतकपुरी सड़क धंसने की याद भी ताजा कर दी। उस मामले में जांच के बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईकोर्ट में दावा कुछ और, जमीन पर तस्वीर अलग
नगर निगम ने हाईकोर्ट में दावा किया था कि शहर के 236 जलभराव वाले स्थानों में से 136 का स्थायी समाधान कर दिया गया है। लेकिन पहली ही तेज बारिश में यह दावा धराशायी हो गया। शहर के करीब 400 स्थानों पर जलभराव हुआ। 150 से अधिक कॉलोनियां, प्रमुख सड़कें, बाजार और मल्टीस्टोरी इमारतों की पार्किंग तक पानी में डूब गईं। कई इलाकों में सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहा।
नाले में बही बाइक, कई जगह लगा लंबा जाम
गुड़ागुड़ी क्षेत्र में तेज बहाव के कारण एक युवक की बाइक नाले में बह गई। वहीं शहरभर में जलभराव और गड्ढों के कारण कई वाहन बीच रास्ते बंद हो गए। प्रमुख मार्गों पर घंटों लंबा जाम लगा रहा और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कलेक्टर खुद उतरीं मैदान में
बारिश से बिगड़े हालात को देखते हुए कलेक्टर रुचिका चौहान ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। नगर निगम की टीमों ने मड पंप, सक्शन मशीन और जेसीबी की मदद से जल निकासी अभियान चलाया। जराजेश्वरी गार्डन, भिंड रोड, दीनदयाल नगर, यूनिपेच फैक्ट्री रोड, तिकोनिया पार्क, कंपू, गोला का मंदिर, घासमंडी, नयापुरा और लक्ष्मीबाई कॉलोनी सहित कई इलाकों में देर रात तक राहत कार्य जारी रहे।
पहली ही तेज बारिश ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि नई सड़कें धंस रही हैं और जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है, तो आखिर शहर की मानसून तैयारियों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन लेगा?