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दिहाड़ी मजदूर की बेटी से भारतीय हॉकी की नई उम्मीद तक: टूटी स्टिक से अभ्यास करने वाली नौशीन नाज ने गोलों से लिखी सफलता की कहानी

दिहाड़ी मजदूर पिता की बेटी नौशीन नाज ने टूटी हॉकी स्टिक से अभ्यास शुरू किया और आज भारतीय महिला हॉकी की उभरती प्रतिभाओं में शामिल हैं। राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 9 गोल कर टॉप स्कोरर बनीं नौशीन ने अंडर-18 एशिया कप और एफआइएच यूथ हॉकी 5एस एशियाई चैंपियनशिप-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। जानिए संघर्ष से सफलता तक का उनका प्रेरक सफर।
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नौशीन नाज

नौशीन नाज

क्रिकेट खेलना चाहती थीं, बहन की प्रेरणा से थामी हॉकी स्टिक; राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 9 गोल कर बनीं टॉप स्कोरर, अब भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाने का सपना

ग्वालियर। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो अभाव भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकते। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले की 15 वर्षीय हॉकी खिलाड़ी नौशीन नाज इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। दिहाड़ी मजदूर पिता की बेटी नौशीन ने टूटी हुई हॉकी स्टिक से अभ्यास शुरू किया और आज भारतीय महिला हॉकी की उभरती प्रतिभाओं में अपनी पहचान बना ली है। हाल ही में उन्होंने अंडर-18 एशिया कप-2026 और एफआइएच यूथ हॉकी 5एस एशियाई चैंपियनशिप-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर प्रदेश का नाम रोशन किया। फिलहाल वह भोपाल स्थित मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी में अपने खेल को और निखार रही हैं।

पत्रिका से विशेष बातचीत में नौशीन ने बताया कि उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। परिवार बड़ा होने के कारण आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही। कई बार नई हॉकी स्टिक खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। ऐसे में उन्होंने टूटी हुई स्टिक को कपड़े से बांधकर अभ्यास किया। वे कहती हैं कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया।

क्रिकेट से हॉकी तक का सफर

दिलचस्प बात यह है कि नौशीन की पहली पसंद हॉकी नहीं, बल्कि क्रिकेट था। वह क्रिकेटर बनना चाहती थीं, लेकिन उनकी बड़ी बहन पहले से हॉकी खेलती थीं। बहन की प्रेरणा और स्थानीय हॉकी शिविर से जुड़ने के बाद उन्होंने हॉकी को अपना लक्ष्य बना लिया। लगातार मेहनत का परिणाम वर्ष 2023 में मिला, जब उनका चयन मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी के ट्रायल में हो गया। नौशीन मानती हैं कि अकादमी में मिला प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी कोचों का मार्गदर्शन उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में मचाया धमाल

बिहार में आयोजित 16वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैंपियनशिप नौशीन के करियर का सबसे यादगार टूर्नामेंट रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 9 गोल दागकर सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। फाइनल में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। इसी प्रदर्शन के दम पर उनका चयन भारतीय प्रशिक्षण शिविर (नेशनल कैंप) के लिए हुआ।

भारत की जर्सी पहनने का सपना हुआ पूरा

नेशनल कैंप में शानदार प्रदर्शन के बाद नौशीन को भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने जापान के काकामिगाहारा में आयोजित अंडर-18 एशिया कप-2026 और एफआइएच यूथ हॉकी 5एस एशियाई चैंपियनशिप-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह मानती हैं कि व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन टीम खिताब नहीं जीत सकी, जिसका उन्हें आज भी मलाल है।

अब सीनियर टीम में जगह बनाने का लक्ष्य

सात भाई-बहनों वाले परिवार से आने वाली नौशीन का अगला लक्ष्य भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाना और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतना है। वह कहती हैं, "मेरा सपना सिर्फ भारत के लिए खेलना और तिरंगा ऊंचा करना है। जब भी मैदान पर उतरती हूं, यही सोचती हूं कि मेरे प्रदर्शन से देश और परिवार दोनों का नाम रोशन हो।"

नौशीन नाज की कहानी केवल खेल में सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सपनों को साकार करने की मिसाल है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो टूटी हुई हॉकी स्टिक भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकती है। आज वह उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा हैं, जो आर्थिक अभावों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।