
Love Trap Case-ग्वालियर में हाईकोर्ट की डबल बेंच में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान फिल्मी ड्रामे जैसा चौंकाने वाला मामला सामने आया। 12वीं पास युवक ने दूसरे धर्म की युवती के सामने खुद को बड़ी जमीन का मालिक बताकर उसे अपने साथ रख लिया, जब कोर्ट में सच की परतें खुलीं, तो युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। यह लड़की उसी युवक के साथ रहने पर पिछले कुछ दिनों से अड़ी हुई थी।
युवक का यह झूठ और उसकी हकीकत जानकर अदालत भी स्तब्ध रह गई। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवक के पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। 12वीं पास करने के बाद वह पढ़ाई भी नहीं कर रहा और परिवार की मदद करने के बजाय उसने एक लड़की को अगवा किया और पिता के पैसे चुराकर उसे किराए के मकान में रखा। सुनवाई के दौरान भिंड एडिशनल एसपी की सोशल स्टेटस रिपोर्ट और कोर्ट रूम में मौजूद युवक (अमित) के माता-पिता के बयानों ने युवक के दावों की हवा निकाल दी।
युवक के मानसिक रूप से बीमार पिता व एक साल से बेड पर रहने वाली लाचार मां (जो व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंची थीं) ने साफ कहा कि उन्हें बेटे के इस कारनामे की भनक तक नहीं थी। पिता ने बताया कि उनके पास मात्र 7 बीघा जमीन है और अमित के नाम एक इंच भी जमीन नहीं है। युवक ने भी कबूल किया कि वह घर से पैसे चुराकर डबरा में 1600 रुपए महीने के किराए के कमरे में लड़की को रख रहा था और उसका खर्च उठा रहा था। युवक की मां ने अदालत में दो टूक कह दिया कि वे इस युवती को अपनी बहू के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
कोर्ट ने युवती को हकीकत से रूबरू कराया कि अमित पूरी तरह बेरोजगार है और उसके पास कोई संपत्ति नहीं है, तो वह अवाक रह गई। पहले तो युवती ने इस डर से माता-पिता के पास जाने से मना कर दिया कि उसके परिजन अब उसे स्वीकार नहीं करेंगे, जिसके बाद कोर्ट ने उसे ग्वालियर के 'वन-स्टॉप सेंटर' भेजने का निर्देश दिया।
मामले में असली मोड़ तब आया जब कोर्ट द्वारा नियुक्त वरिष्ठ काउंसलर अंजली ज्ञानानी ने सूझबूझ से युवती और उसके माता-पिता की काउंसिलिंग की युवती ने अपने सारे डर छोड़ माता-पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, वहीं परिजनों ने भी बड़े दिल का परिचय देते हुए अपनी बेटी को सहर्ष गले लगा लिया। माता-पिता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे बेटी का दाखिला दोबारा 12वीं कक्षा में करवाएंगे और उसकी पढ़ाई पूरी कराएंगे।