
Gwalior High Court Stay : दतिया के पूर्व राजपरिवार की ऐतिहासिक धरोहरों और संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर छिड़ी कानूनी जंग में मंगलवार को अहम मोड़ आ गया। ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दतिया किले समेत अन्य विवादित संपत्तियों की खरीद- बिक्री और इनमें से किसी भी तरह के तीसरे पक्ष के अधिकार सृजित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। दतिया के पूर्व राजपरिवार की जिन संपत्तियों पर विवाद है उनकी कीमत करीब 1600 करोड़ रुपए की आंकी जा रही है।
अधीनस्थ कोर्ट ने संपत्तियों पर अंतरिम स्टे देने की अर्जी नामंजूर कर दी थी
राजपरिवार की संपत्तियों का बंटवारा विवाद 2019 से चल रहा है। हेमलता सिंह व गिरिराज सिंह दतिया की निचली कोर्ट के 24 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। अधीनस्थ कोर्ट ने संपत्तियों पर अंतरिम स्टे देने की उनकी अर्जी नामंजूर कर दी थी।
ग्वालियर हाईकोर्ट में अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी, यदि विचारण के दौरान संपत्तियां बेचीं या हस्तांतरित की तो विवाद अधिक पेचीदा हो जाएगा। इसलिए यथास्थिति रखना जरूरी है। अपील में सेंवढ़ा किला और पीली कोठी का भी स्पष्ट ब्योरा शामिल है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने मामले में थर्ड पार्टी राइट्स बनाने पर भी पाबंदी लगा दी है।
निचली कोर्ट का यह था तर्क
निचली कोर्ट ने पूर्व में अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए टिप्पणी की थी कि यदि मुकदमे के दौरान संपत्तियों का अंतरण होता भी है और बाद में वादियों का हक साबित हो जाता है, तो ऐसा कोई भी सौदा अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
दतिया के पूर्व राजपरिवार की करीब 1600 करोड़ रुपए की संपत्ति विवादित बनी हुई है। इसमें दतिया का ऐतिहासिक किला भी शामिल है। करीब 55 बीघा में फैले इस किले की कीमत 500-700 करोड़ रुपए आंकी गई है। विवादित संपत्तियों में सेवढ़ा का किला भी है। सभी संपत्तियों की खरीद-बिक्री, नामांतरण और निर्माण पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई थी।
पूर्व दतिया राजपरिवार का यह आपसी विवाद चचेरे भाइयों के बीच चल रहा है। एक पक्ष में घनश्याम सिंह हैं और दूसरे पक्ष में उनके चचेरे भाई गिरिराज सिंह और बुआ हेमलता हैं। दोनों पक्षों के बीच संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से कानूनी जंग जारी है।