
MP fake passport racket: MP के 5 जिलों में फर्जी पासपोर्ट का खेल का खुलासा (फोटो सोर्स- Magnific)
Illegal Bangladeshis: धर्म की आड़ में फर्जी पासपोर्ट (MP fake passport racket) बनवाने का खेल ठेके पर चल रहा था। एसटीएफ की गिरफ्त में आए रियाल चौधरी सहित चार आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पांच जिलों ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्ना, छिंदवाड़ा और बैतूल- से 70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने करीब 17.50 लाख रुपए दलालों और सरकारी अमले को घूस दी गई। चोरी-छिपे बॉर्डर पार कराने से लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और सरकारी मुहर लगवाने हर कदम पर रुपए दिए गए।
जांच में पता चला है कि अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक अंकसूचियां और मूल निवास प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज तैयार करने के बदले दलालों ने प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए वसूले। इसके अलावा इन जाली दस्तावेजों के पुलिस सत्यापन और सरकारी कार्यालयों से मुहर लगवाने के नाम पर 5-5 हजार रुपए अलग से खर्च किए गए।
शेष पांच से दस हजार रुपए रकम दलालों और सिंडिकेट में शामिल अन्य लोगों के कमीशन के रूप में बंटी। कुल मिलाकर प्रत्येक घुसपैठिए ने 25-30 हजार रुपए खर्च कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। अकेले डबरा क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है। हर सरकारी मुहर के लिए 3-3 हजार रुपए की घूस दी गई।
इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी (Riyal Chaudhary) खुद एक अवैध बांग्लादेशी नागरिक है। उसने वर्षों पहले चोरी-छिपे भारतीय सीमा में प्रवेश किया था। लंबे समय तक असम में छिपा रहा। इसके बाद बौद्ध धर्म के अनुयायियों के संपर्क में आकर मध्यप्रदेश में अपना जाल फैलाया। खुद का फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इसी ट्रैक का इस्तेमाल कर अन्य घुसपैठियों को भी बॉर्डर पार कराई। फर्जी दस्तावेजों से भारतीय पासपोर्ट दिलवाए।
इस देशविरोधी साजिश में लिप्त स्थानीय मददगारों, नगर निगम, नगर पालिका, राजस्व विभाग, सरपंच, पार्षदों के साथ ही कई पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को भी चिह्नित किया गया है। एसटीएफ इन संदेहियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। नोटिस जारी किए जा रहे हैं। भोपाल एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार फर्जीवाड़े में संलिप्त हर एक चेहरा बेनकाब कर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
रियाल की साजिश बांग्लादेश से बच्चों को भोपाल लाकर पढ़ाने, जाली दस्तावेज तैयार कर थाईलैंड, म्यांमार, जापान और कंबोडिया भेजने की थी। मठ के पीछे 40 बच्चों की क्षमता वाला हॉस्टल भी तैयार कराया जा रहा था। वह बच्चों की मदद और विभिन्न कामों के नाम पर स्थानीय लोगों से 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक डोनेशन वसूलता था। विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। उसने पासपोर्ट गुम होने का बहाना बनाकर अलग-अलग समय में चार बार पासपोर्ट बनवाए थे।
एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए दस्तावेज बनवाने के बदले 10 से 15 हजार रुपए प्रति व्यक्ति वसूले गए। पुलिस सत्यापन और सरकारी मुहर लगवाने के नाम पर पांच हजार रुपए अलग से खर्च किए गए। दलालों और सिंडिकेट के कमीशन को मिलाकर हर घुसपैठिए ने 25 हजार से 30 हजार रुपए खर्च कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। अकेले डबरा (ग्वालियर) क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आ चुकी है। हर सरकारी मुहर के लिए रिश्वत दी गई।
एसटीएफ ने भोपाल में रियाल के साथ रहने वाले सेवक सुभाष और दस्तावेज तैयार करने वाले कैफे संचालक विजय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मठ की छानबीन के दौरान राजस्थान के दो भंते भी मिले। उनसे भी पूछताछ की है।
इस देशविरोधी साजिश में लिप्त स्थानीय मददगारों, नगर निगम, राजस्व विभाग, सरपंच, पार्षदों के साथ ही पुलिस सत्यापन से जुड़े 2021 और वर्ष 2022-23 में पदस्थ रहे 15 अधिकारियों की भूमिका संदेह के दायरे में है। एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है। 100 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट्स की जांच जारी है।
Updated on:
16 Sept 2026 08:57 am
Published on:
16 Sept 2026 08:46 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
