स्मार्ट सिटी के अफसरों के लापरवाही पूर्ण रवैये के कारण शहर में चल रहे कार्यों की गति काफी धीमी है। कछुआ गति का आलम यह है कि जो काम जून-2020 ...
स्मार्ट सिटी की कछुआ गति…
gwalior smart city.. ग्वालियर. स्मार्ट सिटी के अफसरों के लापरवाही पूर्ण रवैये के कारण शहर में चल रहे कार्यों की गति काफी धीमी है। कछुआ गति का आलम यह है कि जो काम जून-2020 में पूरे होने थे, वह 2024 में भी चल रहे हैं। चार साल बाद भी 15.61 किलोमीटर की थीम रोड पूरी नहीं बन पाई है। जगह-जगह जालियां टूटी हैं, डक्ट खुले हैं और गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। कंपू व आमखो क्षेत्र में डिवाइडरों का निर्माण काफी धीमी गति से चल रहा है। अब 30 जून तक का वक्त कार्य पूरा करने के लिए दिया गया है। क्योंकि स्मार्ट सिटी का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। सड़क और डिवाइडर के कार्य की धीमी गति से आमजन को काफी परेशानी हो रही है, इससे क्षेत्रीय लोग नाराज हैं। जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि थीम रोड का कार्य पूरा हो चुका है, कुछ कार्य रेलवे व बिजली कंपनी के चलते लेट हो गया था। डिवाइडर का काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।
स्मार्ट सिटी की ओर से कटोराताल से कैंसर पहाड़ी तक 750 मीटर, ङ्क्षसधिया महल से अचलेश्वर रोड 250 मीटर, आमखो बस स्टैंड से कंपू बस स्टैंड तक एक किलोमीटर, राजपायगा रोड 400 मीटर, ङ्क्षजसी नाला 1330 मीटर, छतरी मंडी 750 मीटर व ईदगाह रोड 510 मीटर तो बना दी है, लेकिन यह रोड भी आधी-अधूरी ही बनी हैं। इन पर जगह-जगह जालियां टूटी पड़ी हैं, डक्ट खुले पड़े हैं।
आमखो, राजपायगा रोड, थीम रोड पर बिजली का काम बाकी रह गया है। पूरी स्मार्ट रोड पर जगह-जगह डक्ट खुले पड़े हैं, जिन्हें बंद करना चाहिए। डिवाइडरों पर विद्युत पोल नहीं लगे। नाला निमार्ण में तकनीकी की कमी बताई है।
मार्ट रोड व पेडस्ट्रीयन जोन के काम के लिए पूर्व में कोई कंपनी नहीं आई। बाद में प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ने पर एलएंडटी कंपनी ने 299 करोड़ में काम लिया। साथ ही अफसरों की खराब प्लाङ्क्षनग के चलते प्रोजेक्ट की डिजाइन भी बदलती रही। प्लान तैयार हुआ तो कंपू क्षेत्र में रेलवे से सहमति नहीं लेने से यह प्रोजेक्ट हुआ।
थीम रोड के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के अफसरों की घटिया प्लाङ्क्षनग का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि अधिकारी प्रोजेक्ट लेट होने के लिए कभी टेंडर प्रक्रिया में देरी, ड्राइंग डिजाइन और जमीन संबंधी विवादों को कारण बता रहे हैं। इन सभी कारणों के चलते 299 करोड़ रुपए में 15.62 किलोमीटर की स्मार्ट रोड का प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पा रहा है। थीम रोड 15.62 किलोमीटर से 5.1 किलोमीटर तक सिमट कर रह गई है।
बता दें कि पूर्व में थीम रोड 18 किलोमीटर बननी थी, लेकिन तत्कालीन प्रमुख सचिव संजय दुबे ने इसमें बदलाव करते हुए इसे 15.62 किलोमीटर कर दिया। उसके बाद भी अब यह सिर्फ 5.1 किलोमीटर तक ही बन पाई है। बाकी सड़क जैसे अचलेश्वर रोड, लोहिया बाजार, डीडवाना ओली, दाना ओली सहित अन्य सड़कों का काम निगम को सौंपा गया है।
महाराज बाड़े पर इसी प्रोजेक्ट में से करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च बनाए गए पेडस्ट्रीयन जोन की भी हालात खराब होती जा रही है और अब यहां लगाए गए पत्थर भी उखडऩे लगे है। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां पूर्व की ड्राइंग डिजाइन के अनुसार कार्य नहीं होना था।
स्मार्ट रोड के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। काम काफी धीमी गति के साथ कछुआ की तरह चल रहा है। क्वालिटी के हिसाब से काम नहीं हो रहा है। हल्की सी बारिश में भी जगह-जगह पानी भर जाता है। जिम्मेदार अफसरों को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ.विमलेन्द्र ङ्क्षसह राठौर, शहरवासी
स्मार्ट सिटी के काम कभी बंद, तो कभी चालू होता रहता है। डिवाइडर को बनाने में काफी समय लग रहा है। इससे आवागमन में काफी परेशानी हो रही है। स्मार्ट सिटी के अफसरों को काम में तेजी दिखाना चाहिए।
आकाश भदौरिया, शहरवासी
थीम रोड का काम लगभग पूरा हो चुका है। कंपू क्षेत्र में जरूर डिवाइडर बनाने का काम रह गया है, जो जल्द पूरा हो जाएगा। डक्ट वाला कार्य बिजली कंपनी के चलते लेट हुआ था, तो कंपू क्षेत्र का काम रेलवे के कारण लेट हुआ था।
नीतू माथुर, सीईओ स्मार्ट सिटी