ग्वालियर. जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी दावों की पोल खुल गई है। ग्वालियर जिले में पुरुष नसबंदी के आंकड़े बेहद ङ्क्षचताजनक स्थिति में पहुंच गए हैं। 2025 में ट्रेंड सर्जन के अभाव में यह महत्वपूर्ण सेवा लगभग ठप रही, जिसके चलते पूरे साल में मात्र 9 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई, जबकि इसी अवधि में 2629 […]
ग्वालियर. जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी दावों की पोल खुल गई है। ग्वालियर जिले में पुरुष नसबंदी के आंकड़े बेहद ङ्क्षचताजनक स्थिति में पहुंच गए हैं। 2025 में ट्रेंड सर्जन के अभाव में यह महत्वपूर्ण सेवा लगभग ठप रही, जिसके चलते पूरे साल में मात्र 9 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई, जबकि इसी अवधि में 2629 महिलाओं ने परिवार नियोजन के लिए महिला नसबंदी का सहारा लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग पिछले वर्ष के टारगेट का आंकड़ा भी ठीक से नहीं बता पा रहा है, जो सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार जहां प्रोत्साहन राशि 3000 पुरुषों को, 2000 महिलाओं को देती है, वहीं आशा कार्यकर्ताओं को भी अतिरिक्त मानदेय पुरुष नसबंदी पर 400, महिला पर 300 मिलता है। इसके बावजूद, पिछले साल की तुलना में पुरुष नसबंदी के आंकड़ों में भारी गिरावट आई है।
पिछले साल हमारे पास ट्रेंड सर्जन न होने के कारण पुरुषों की नसबंदी सिर्फ 9 ही हो पाई। साथ ही, पिछले साल का टारगेट भी हमें ठीक से नहीं मिला है। नए सर्जन मिलने के बाद नसबंदी को बढ़ावा देने नए सिरे से प्रयास शुरू कर रहे हैं।
डॉ. प्रबल प्रताप ङ्क्षसह, डीएचओ-2