ग्वालियर

ग्वालियर … नियम सबके लिए बराबर: टाइपिंग परीक्षा की जो छूट जूनियर को मिली, वही सीनियर को भी दी जाए

हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने कर्मचारियों के साथ होने वाले प्रशासनिक भेदभाव पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग किसी कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारी को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त में छूट देकर पदोन्नत कर सकता है, तो वही लाभ उससे वरिष्ठ (सीनियर) कर्मचारी को भी मिलना चाहिए....

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ग्वालियर ... नियम सबके लिए बराबर: टाइपिंग परीक्षा की जो छूट जूनियर को मिली, वही सीनियर को भी दी जाए
ग्वालियर ... नियम सबके लिए बराबर: टाइपिंग परीक्षा की जो छूट जूनियर को मिली, वही सीनियर को भी दी जाए

ग्वालियर. हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने कर्मचारियों के साथ होने वाले प्रशासनिक भेदभाव पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग किसी कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारी को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त में छूट देकर पदोन्नत कर सकता है, तो वही लाभ उससे वरिष्ठ (सीनियर) कर्मचारी को भी मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता भीकम ङ्क्षसह को उसी तारीख (11.12.2010) से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत किया जाए, जिस दिन उनके जूनियर को किया गया था।
याचिकाकर्ता भीकम सिंह को वर्ष 2001 में कृषि उपज मंडी समिति में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किया गया था। साल 2010 में विभाग द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से सहायक ग्रेड-3 (एलडीसी) के दो रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित की गई। नियमों के मुताबिक, इस पद के लिए हायर सेकंडरी या हाई स्कूल के साथ हिंदी टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था।


बिना कारण बताए अयोग्य घोषित कर दिया

डीपीसी की बैठक में पाया गया कि याचिकाकर्ता भीकम ङ्क्षसह और उनके जूनियर कर्मचारी विक्रम सिंह जादौन, दोनों के पास ही केवल हाई स्कूल की डिग्री थी और दोनों ने ही हिंदी टाइपिंग की परीक्षा पास नहीं की थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि डीपीसी ने समान योग्यता होने के बावजूद भीकम सिंह को बिना कोई कारण बताए अयोग्य घोषित कर दिया। वहीं, उनके कनिष्ठ विक्रम सिंह जादौन को इस शर्त के साथ पदोन्नत कर दिया गया कि वे दो साल के भीतर हिंदी टाइपिंग परीक्षा पास कर लें।


भेदभाव के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस भेदभाव के खिलाफ भीकम ङ्क्षसह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर हुई एक विभागीय जांच में भी यह माना गया था कि चयन समिति द्वारा विक्रम ङ्क्षसह को दी गई पदोन्नति वैध नहीं थी । इसके बावजूद विभाग ने 2023 में एक आदेश जारी कर भीकम सिंह को पदोन्नति देने से साफ इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को पदोन्नत करने का आदेश दिया है।

Published on:
02 Jun 2026 06:27 pm