ग्वालियर

कचरे पर हाईकोर्ट सख्त: सिर्फ सरकारी पैसे से नहीं चलेगा काम, ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच अपनाने को कहा

शहर में कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम ग्वालियर को संसाधन जुटाने के लिए आउट ऑफ द बॉक्स सोच के साथ आगे बढ़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकारी पैसे काम नहीं चलेगा। इसके लिए अलग से फंड जुटाने की […]

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Jan 24, 2026

शहर में कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम ग्वालियर को संसाधन जुटाने के लिए आउट ऑफ द बॉक्स सोच के साथ आगे बढ़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकारी पैसे काम नहीं चलेगा। इसके लिए अलग से फंड जुटाने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छता व्यवस्था की सबसे बड़ी बाधा वित्तीय संसाधनों और वाहनों की कमी है, जिसे दूर किए बिना ग्वालियर को स्वच्छ और हरित शहर बनाना संभव नहीं है। कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसकी पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट नगर निगम से 16 फरवरी को तलब की है।

कोर्ट ने यह आदेश सरताज सिंह तोमर द्वारा दायर जनहित याचिका में दिए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि केदारपुर पर कचरे का ढेर लगा है। शहर में गंदगी है। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया। अमीकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम के पास वर्तमान में करीब 240 ई-टिपर वाहन हैं, जो 66 वार्डों में से सिर्फ 36 वार्डों में ही कचरा संग्रहण कर पा रहे हैं। जबकि पूरे शहर को कवर करने के लिए लगभग 600 वाहनों की आवश्यकता है। मौजूदा वाहन प्रतिदिन तीन से चार राउंड लगा रहे हैं, इसके बावजूद कई इलाकों में नियमित कचरा उठान नहीं हो पा रहा। अमीकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि नगर निगम को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहकर सीएसआर फंड, सामाजिक संस्थाओं, व्यावसायिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी से एक मजबूत फंड तैयार करना चाहिए। कोर्ट को बताया गया कि औद्योगिक विभाग के माध्यम से कॉर्पोरेट कंपनियों से लिखित अनुरोध कर सीएसआर राशि नगर निगम के स्वच्छता फंड में जमा कराई जा सकती है।

सिटीजन समिटि करने का सुझाव

वार्ड स्तर पर सिटीजन समिट आयोजित करने, प्रतिष्ठित नागरिकों, डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकीलों, व्यापारियों, बिल्डरों, रोटरी, लायंस क्लब, इनर व्हील क्लब जैसी संस्थाओं को जोड़ने के सुझाव भी दिए गए। कोर्ट ने कहा कि जनभागीदारी से न केवल संसाधन बढ़ेंगे, बल्कि स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी आएगी।

-सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि सभी पार्षदों के पास अपने-अपने वार्ड के लिए विकास निधि उपलब्ध है। यदि प्रत्येक पार्षद कम से कम एक कचरा वाहन उपलब्ध कराए, तो नगर निगम के बेड़े में बड़ी संख्या में वाहन जुड़ सकते हैं। विधायकों और सांसदों से भी अपने फंड से सहयोग लेने की संभावना पर जोर दिया गया।

-हाईकोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि नगर निगम द्वारा नगर निगम ग्वालियर (स्वच्छता पेनाल्टी एवं गार्बेज) नाम से एक विशेष खाता खोला गया है, जिसमें आमजन, संस्थाएं और कॉर्पोरेट योगदान कर सकते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिए कि इस खाते का व्यापक प्रचार किया जाए और स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर क्यूआर कोड सहित जानकारी प्रदर्शित की जाए।

-कार्यवाही के दौरान कोर्ट में मौजूद कुछ अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से 21 हजार रुपये का योगदान भी कि

Published on:
24 Jan 2026 11:17 am
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