
शिवपुरी। फर्जी डॉक्यूमेंट से रोजगार सहायक बने युवक ने शिकायत के बाद अपना इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन पांच साल से नौकरी लगातार कर रहा है। शिकायतकर्ता ने मामला हाईकोर्ट में लगा दिया है, जिसकी तारीख जिला पंचायत को करना पड़ रही है। वर्ष 2012-13 में हुई रोजगार सहायकों की भर्ती में ग्राम आंकुर्सी में रहने वाले राजेंद्र सिंह पुत्र विशुनलाल जाटव ने अपने डॉक्यूमेंट के साथ कंप्यूटर का डिप्लोमा भी लगाया, जिसके उसे 50 अंक अतिरिक्त दिए गए।
सूची में दूसरे नंबर पर रहे पूरन पुत्र कंचनलाल जाटव ने जब कंप्यूटर डिप्लोमा फर्जी लगाए जाने की शिकायत की, तो राजेंद्र ने वर्ष 2013 में अपना इस्तीफा जनपद सीईओ पोहरी को दे दिया। रोचक पहलू यह है कि जिस संस्थान का डिप्लोमा लगाया, वो भी उसे फर्जी करार दे चुका है ।
वर्ष 2012-13 में जनपद पंचायत पोहरी ने रोजगार सहायकों की अनंतिम सूची जारी की, तो उसमें पहले नंबर पर राजेंद्र जाटव का नाम था। राजेंद्र के कुल 134 अंक थे तथा उसे कंप्यूटर डिप्लोमा के 50 अंक दिए गए। इसी सूची में दूसरे नंबर पर पूरन जाटव को 118 अंक मिले।
राजेंद्र ने 26 दिसंबर 2012 को ग्राम पंचायत भौराना में ज्वाइनिंग दे दी। इस बीच दूसरे नंबर पर रहे पूरन जाटव ने यह पता कर लिया कि राजेंद्र ने जो कंप्यूटर डिप्लोमा लगाया है, वो फर्जी है। इस बात की शिकायत पूरन ने जनपद व जिला पंचायत सीईओ से की।
कुलपति ने भी दिया फर्जी दस्तावेज का प्रमाण पत्र
राजेंद्र ने महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय का कंप्यूटर डिप्लोमा लगाया था, जिसके उसे 50 अंक मिले थे। शिकायत के बाद जब पतारशी हुई तो महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 8 मई 2013 को एक पत्र जनपद पंचायत पोहरी को दिया, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया कि राजेंद्र सिंह जाटव को हमारे विश्वविद्यालय ने किसी भी तरह का कोई प्रमाण पत्रया अंकसूची जारी नहीं की।
शिकायत होते ही दिया इस्तीफा
फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी पाने की शिकायत जब की गई, तो राजेंद्र को लगा कि अब मेरे खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा सकता है। इसलिए राजेंद्र ने 1 मई 2013 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पोहरी को इस्तीफा दे दिया। राजेंद्र ने अपने इस्तीफे में लिखा कि मैं अपने व्यक्तिगत एवं घरेलू कारणों से ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्य करने में असमर्थ हूं। इसलिए मेरा त्याग पत्र(इस्तीफा) स्वीकार किया जाए।
"राजेंद्र जाटव वाले मामले की कोर्ट में तारीख चल रही है और इसमें जिला पंचायत भी अपना पक्ष रख रही है। इस मामले में अभी 16 अक्टूबर लगी थी, जिसे बढ़ाकर अब 26 अक्टूबर को कर दी है।"
शरीफ खान, रीडर जिपं सीईओ