
15-20 हजार की नौकरी में अमेरिका के लोगों से रोज लाखों की साइबर ठगी
ग्वालियर। ग्वालियर जिले के मोहना कस्बे से संचालित हो रहे एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा होने के बाद साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए चार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे केवल इस पूरे गिरोह के मोहरे थे। असली सरगना प्रबल सिंह परिहार, निवासी अहमदाबाद (गुजरात), है जिसने पूरे रैकेट का संचालन किया और मोहना में होटल के एक कमरे से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाने का नेटवर्क तैयार किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि उन्हें हर महीने 15 से 20 हजार रुपए वेतन दिया जाता था। प्रबल सिंह परिहार का मानना था कि ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों पर पुलिस की निगरानी अपेक्षाकृत कम रहती है, इसलिए उसने मोहना को अपने फर्जी कॉल सेंटर के संचालन के लिए चुना। आरोपियों ने यह भी दावा किया कि अहमदाबाद समेत कई अन्य शहरों में भी इसी तरह के कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
रिश्तेदारी का मिला फायदा, होटल में जमाया ठिकाना
जांच में सामने आया कि होटल जैनपथ के संचालक प्रवेश सिंह तोमर, निवासी मुरैना, और प्रबल सिंह परिहार रिश्तेदार हैं। इसी रिश्ते का फायदा उठाकर प्रबल ने सोलर सिस्टम और क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार का हवाला दिया और होटल का कमरा नंबर छह किराए पर लिया। पिछले करीब चार महीनों से यहीं से ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
शनिवार को पुलिस ने होटल पर छापा मारकर अभिषेक राजपूत (26), निवासी वटवा (अहमदाबाद), शिवेंद्र सिंह उर्फ राजन (31), निवासी घोड़ासर (अहमदाबाद), आर्यन उर्फ लाला राजपूत (20), निवासी सीपरी बाजार (झांसी) और शुभोम उर्फ शुभम घोष (23), निवासी दीमापुर (नागालैंड) को गिरफ्तार किया था।
फ्रैंक, ब्रूस और लुईस बनकर करते थे ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने की वजह से उन्हें इस काम के लिए चुना गया था। विदेशी नागरिकों का भरोसा जीतने के लिए वे नकली नामों का इस्तेमाल करते थे। अभिषेक खुद को फ्रैंक, आर्यन ब्रूस और शुभम लुईस बताकर अमेरिका के लोगों से बातचीत करता था।
प्रबल सिंह परिहार रोजाना ईमेल या व्हाट्सएप के जरिए 300 से 400 संभावित ग्राहकों का डेटा भेजता था। इसके बाद रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक आरोपी इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से खुद को अमेरिका की प्रसिद्ध लेंडिंग क्लब कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कम ब्याज पर ऋण दिलाने का झांसा देते थे। बातचीत के दौरान वे पीड़ितों से गिफ्ट वाउचर खरीदवाकर उनकी जानकारी हासिल करते और रोजाना करीब 40 से 50 हजार रुपए मूल्य के गिफ्ट वाउचर की ठगी करते थे। आरोपियों के रहने और खाने-पीने का खर्च भी सरगना ही उठाता था।
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं, इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड प्रबल सिंह परिहार अभी फरार है। मोहना थाना पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रबल की गिरफ्तारी के बाद इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मोहना थाना प्रभारी विनय सिंह तोमर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा प्रतीत हो रहा है। पुलिस सरगना और उसके अन्य साथियों की तलाश के साथ-साथ इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन और अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की भी जांच कर रही है।