Pension- कोर्ट के तकनीकी शिक्षा संचालनालय को निर्देश, प्राचार्य पद से पेंशन लाभ, भुगतान के दिए आदेश
Pension- सरकार के तमाम दावों के विपरीत सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ग्रेच्युटी जीपीएफ आदि के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों को खासा परेशान होना पड़ता है। वे सालों तक इस ऑफिस से उस ऑफिस तक भटकते रहते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन Pension ग्रेच्युटी जीपीएफ आदि के भुगतान की समय पर जिम्मेदारी को सरकार का दायित्व बताया। सेवानिवृत्ति के बाद के आर्थिक लाभ के भुगतान नहीं होने पर हाईकोर्ट ने खासी सख्ती भी दिखाई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक केस की सुनवाई में यह सख्त रुख अपनाया। तकनीकी शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कोर्ट ने इस संबंध में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को हर हाल में तीन माह में सभी लंबित भुगतान करने के आदेश जारी किए। कोर्ट के इस रुख के बाद ऐसे सभी पेंशनर्स को खासी राहत मिलने की आस जागी है जो अपने देयकों के लिए लंबे समय से परेशान हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति के आधार पर सभी पेंशनरी लाभ दिए जाएं
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान न होने पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति के आधार पर सभी पेंशनरी लाभ दिए जाएं। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
तकनीकी शिक्षा संचालनालय से संबंधित पॉलिटेक्निक कॉलेज के एक पूर्व प्राचार्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।याचिकाकर्ता शशि विकसित ने कोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति सन 1984 में हुई थी। शशि विकसित को तब शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, ग्वालियर में व्याख्याता के रूप में पदस्थ किया गया था। बाद में उन्हें पदोन्नति भी दी गई। शशि विकसित पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य बने और करीब 3 दशक की सुदीर्घ सेवाओं के बाद 2024 में सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद से सेवानिवृत्ति के आर्थिक लाभों के लिए वे परेशान हो रहे हैं। शशि विकसित ने याचिका में कहा कि उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ सहित अन्य देयक लंबित थे।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन- ग्रेच्युटी- जीपीएफ आदि का समय पर भुगतान को सरकार की जिम्मेदारी बताया। इसके साथ ही कोर्ट ने तकनीकी शिक्षा संचालनालय को याचिकाकर्ता को 90 दिनों में सभी भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।