ग्वालियर

रोजाना करीब 10 लाख पानी पूरी खा जाते हैं इस शहर के लोग, होती है जबरदस्त कमाई

MP News: मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में कई लोगों ने तो गोलगप्पे के काम को ही फुल-टाइम प्रोफेशन बना लिया है। स्वाद, स्वच्छता और स्टाइलिश परोसने के तरीके ने इस पारंपरिक स्ट्रीट फूड को नया बाजार प्रदान कर दिया है। इसके गजब स्वाद के चलते ग्वालियरवासी हर रोज 20 से 25 लाख रुपए की करीब 10 लाख पानी पूरी खा जाते हैं।

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अब हल्की नहीं रही फुल्की, रोज 20 से 25 लाख की बिक्री (फोटो सोर्स : एआई जेनरेटेड)

MP News: कभी सिर्फ ठेले और नुक्कड़ तक सीमित रहने वाली फुल्की (गोलगप्पा/पानी पूरी) अब हल्की नहीं रह गई है। पानी पूरी सराफा बाजार से लेकर बड़ी चाट दुकानों और हर तरह की पार्टियों में सबसे पहले स्टॉल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों पानी की टिक्की के चाहने वाले इतने बढ़ गए कि ग्वालियर में इसके दुकानदारों की संख्या भी एक हजार के पार जा पहुंची है।

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हींग से लेकर लहसुन का फ्लेवर

  • एक समय था जब बाजार में पानी पूरी(Pani Puri) के लिए सिर्फ एक ही तरह का पानी बनता था। समय के बदलाव और इसकी मांग को देखते हुए इसमें भी प्रयोग किए गए और अब बाजार में पानी पूरी के कई फ्लेवर मौजूद हैं।
  • पानी पूरी बेचने वाले इन्हें बरनियों में अलग-अलग नाम से बनाकर तैयार रखते हैं। बाजार में हरा पानी पुदीना-धनिया, खट्टा-मीठा पानी, लहसुन का पानी, हींग का पानी मौजूद हैं। लोग गोलगप्पे आटे और रवे के सबसे अधिक पसंद करते हैं। आटे के गोलगप्पे 10 रुपए के चार-पांच और रवे के गोलगप्पे 20 रुपए के 6 बेचे जा रहे हैं।
  • लोग गोलगप्पे आटे और रवे के सबसे अधिक पसंद करते हैं। आटे के गोलगप्पे(Pani Puri) 10 रुपए के चार-पांच और रवे के गोलगप्पे 20 रुपए के 6 बेचे जा रहे हैं।

हर रोज 10 लाख पानी टिक्की पीता है ग्वालियर

कई लोगों ने तो गोलगप्पे के काम को ही फुल-टाइम प्रोफेशन बना लिया है। स्वाद, स्वच्छता और स्टाइलिश परोसने के तरीके ने इस पारंपरिक स्ट्रीट फूड को नया बाजार प्रदान कर दिया है। इसके गजब स्वाद के चलते ग्वालियरवासी हर रोज 20 से 25 लाख रुपए की करीब 10 लाख पानी पूरी खा जाते हैं।

शहर में यहां बनती है पानी पूरी

शहर के राय सिंह का बाग, मुरार, हजीरा के गोसपुरा नंबर एक, खासगी बाजार, तारागंज काला सय्यद आदि जगहों पर पानी पूरी सबसे अधिक बनती है। हजीरा के गोसपुरा नंबर एक में तो करीब 100 परिवार पानी की टिक्कियां बनाने का ही काम करते हैं। यहां सुबह 4 बजे से आटे की पानी की टिक्कियों को कच्चे रूप में बनाकर रख लिया जाता है। इसके बाद लगातार तेल में तलकर इन्हें पकाया जाता है।

सीजन में बिकते हैं 500 पैकेट

  • पहले जहां बाजार में ही पानी की टिक्की पीने का चलन था वहीं कोरोना संक्रमण काल के बाद से इसमें बदलाव देखने को मिला है। अब कुछ लोग घर पर ही पानी बनाकर, बाजार से पानी की टिक्की का पैकेट लाकर उपयोग कर रहे हैं।
  • जनकगंज में पानी की टिक्की के पैकेज बेचने वाले अमर चौधरी ने बताया कि तीन तरह के पानी की टिक्कियां बेचते हैं। इनमें आटे वाली टिक्की का पैकेट 30 रुपए की 50 टिक्की, रवे का पैकेट 140 रुपए की 100 टिक्की और सिंधी टिक्की जो उड़द दाल और आटे को मिलाकर बनाई जाती है।
  • सिंधी टिक्की के पैकेट में 30 रुपए की 45 टिक्की होती हैं। आम सीजन में हम रोजाना 300 और गर्मी के सीजन में 500 टिक्की के पैकेट बेच लेते हैं।
  • इसके साथ ही बाजार में 50 से अधिक कंपनियों के पानी के सूखे फ्लेवर बिक रहे हैं।

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Published on:
07 Sept 2025 03:24 pm
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