ग्वालियर

रेलवे का अजब खेल… डॉक्टर के नाम पर 100 रुपए की फीस, ट्रेन में पहुंच रहे ड्रेसर

रेलवे में सफर के दौरान यात्रियों की तबीयत बिगडऩे पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर शनिवार को दिनभर में करीब 15 ट्रेनों से ‘डॉक्टर कॉल’ ...
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Sep 21, 2026
rail doctor
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ग्वालियर. रेलवे में सफर के दौरान यात्रियों की तबीयत बिगडऩे पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर शनिवार को दिनभर में करीब 15 ट्रेनों से ‘डॉक्टर कॉल’ दर्ज किए गए, लेकिन किसी भी ट्रेन में डॉक्टर के पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई। यात्रियों का आरोप है, डॉक्टर के नाम पर 100 रुपए का शुल्क लेने के बावजूद मौके पर चिकित्सक के बजाय ड्रेसर पहुंचते हैं और प्राथमिक उपचार के नाम पर दवाएं देकर लौट जाते हैं।

रेलवे का अपना अस्पताल है, जहां चिकित्सकों के साथ ड्रेसर भी तैनात हैं। यात्रियों का कहना है, ट्रेन में मेडिकल सहायता की जरूरत होने पर डॉक्टर के बजाय ड्रेसर को भेजे जाने से उन्हें अपेक्षित चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल पाता। खासतौर पर वे यात्री जो अपनी नियमित दवाएं साथ रखते हैं और अचानक तबीयत बिगडऩे पर सिर्फ डॉक्टर से परामर्श चाहते हैं, उन्हें भी ड्रेसर से ही जानकारी लेनी पड़ती है।

नहीं दी जाती कोई रसीद

रेलवे की व्यवस्था के तहत ट्रेन में डॉक्टर बुलाने के लिए यात्रियों से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है। टीटीई द्वारा इसकी आधिकारिक रसीद भी दी जाती है। यात्रियों का कहना है, डॉक्टर के नाम पर शुल्क लेने के बाद चिकित्सक के बजाय ड्रेसर भेजा जाना व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

टीटीई की मेडिकल किट भी उपयोग में नहीं…

झांसी मंडल के टीटीई को मेडिकल किट उपलब्ध कराई गई है, लेकिन यात्रियों के अनुसार कई बार टीटीई दवाएं देने से बचते हैं। उनका कहना है कि दवाओं के इस्तेमाल की पर्याप्त ट्रेङ्क्षनग नहीं होने के कारण गलत दवा देने की स्थिति में जिम्मेदारी को लेकर असमंजस रहता है।
शनिवार को सचखंड एक्सप्रेस, पंजाब मेल, ताज एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, नई दिल्ली-बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों में डॉक्टर कॉल दर्ज हुए।

इनका कहना है

ट्रेनों में आने वाले डॉक्टर कॉल पर यात्री को प्राथमिक उपचार के लिए दवा दी जाती है। वहीं गंभीर मामलों में ट्रेन में डॉक्टर भी जाते हैं।

  • मनोज कुमार ङ्क्षसह, पीआरओ, झांसी मंडल
Updated on:
21 Sept 2026 05:59 pm
Published on:
21 Sept 2026 05:59 pm