
रतनजोत का फल खाने के बाद अस्पताल में भर्ती बच्चे।
ग्वालियर। हस्तिनापुर थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में रविवार शाम रतनजोत का फल खाने से 14 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चे गांव में आयोजित भागवत कथा और भंडारे से लौट रहे थे। रास्ते में खेत के किनारे लगे रतनजोत के पौधे के फल को बच्चों ने ड्राई फ्रूट समझकर खा लिया। घर पहुंचने के कुछ देर बाद ही बच्चों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। बच्चों की हालत बिगड़ते देख परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल मुरार लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चों को जयारोग्य अस्पताल समूह के कमला राजा अस्पताल रेफर किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। अधिकांश बच्चों की उम्र 5 से 15 वर्ष के बीच बताई गई है। देर रात तक बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार और विशेष निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार शुरुआती जानकारी में 14 बच्चों के बीमार होने की बात सामने आई थी, लेकिन देर रात तक कुल 15 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया।
पीआइसीयू और एसडीयू में रखकर निगरानी
कमला राजा अस्पताल में बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें अलग-अलग यूनिट में भर्ती किया गया। जानकारी के अनुसार तीन बच्चे पीआइसीयू, नौ एसडीयू और तीन बच्चों को हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती किया गया। कुछ बच्चों के हार्ट और ऑक्सीजन लेवल की भी जांच की गई। प्रारंभिक उपचार के बाद अधिकांश बच्चों की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
बच्चों में तन्नू (9), सुमित (7), गौरव (5), प्रवीण (10), दिव्या (8), दिशा (11), पूजा (11) और आरती (9) सहित अन्य बच्चे शामिल हैं। गंभीर स्थिति वाले बच्चों को आइसीयू में रखकर चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया गया।
डॉक्टर बोले- खाने योग्य नहीं होता रतनजोत का फल
बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम दास ने बताया कि रतनजोत का फल खाने योग्य नहीं होता है। इसके सेवन से बच्चों में फूड पॉइजनिंग जैसी स्थिति बन सकती है। बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत इसी वजह से हुई। बच्चों को समय पर अस्पताल लाकर उपचार शुरू कर दिया गया, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार है।
गांव में मचा हड़कंप
एक साथ कई बच्चों के बीमार होने की सूचना से सिरसौद गांव में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। परिजन बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने बच्चों की हालत को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया और निगरानी में रखा। घटना के बाद ग्रामीणों में रतनजोत के पौधे और उसके फल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत भी सामने आई है, ताकि बच्चे अनजाने में ऐसे जहरीले फलों का सेवन न कर सकें।
Updated on:
21 Sept 2026 06:11 pm
Published on:
21 Sept 2026 06:08 pm
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