
Gwalior Scindia Royal Family Property Dispute: देश के बड़े राजघरानों में शामिल मध्यप्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने में चल रहे संपत्ति बंटवारे विवाद का पटाक्षेप अब नजदीक आ गया है। सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर 16 साल से चल रहे मामले में बुधवार को ग्वालियर अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनकी बुआ उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। समझौते में किसे क्या संपत्ति मिलेगी? इस पर अभी कोर्ट की मुहर लगना बाकी है। 20 जुलाई को इस मामले में फिर से सुनवाई होगी।
संपत्ति विवाद में जो समझौता सामने आ रहा है, उसमें जय विलास पैलेस (ग्वालियर का महल), शिवपुरी, दिल्ली की संपत्तियां सिंधिया के हिस्से में जा सकती हैं। जबकि बुआओं को भी ग्वालियर की कुछ अन्य संपत्तियों में हिस्सा मिलना तय हुआ है। जैसे कि वाटिकाओं की जगह बुआओं के हिस्से में जा सकती हैं। करीब 35 पेज के समझौते में संपत्तियों का ब्यौरा लिखा गया है। संपत्ति विवाद को लेकर जो अलग-अलग कोर्ट में दावे चल रहे हैं, वो सभी समझौते पर मुहर के बाद खत्म हो जाएंगे।
दरअसल सिंधिया राजपरिवार के बीच राजमाता के समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बुआओं ने संपत्ति पर अपना अधिकार जताया है, जबकि सिंधिया का विरोध है कि उनके यहां राजा की गद्दी का कानून चलता है और संपत्ति पर राजा का अधिकार रहता है। इसके चलते बंटवारे के विवाद जिला न्यायालय में पहुंचा। ऊषा राजे, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने वर्ष 2010 में संपत्ति के विवाद को लेकर न्यायालय में एक वाद पत्र पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का बराबर का हक है, इसलिए उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दिया जाए। एक अन्य वाद पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बुआओं के खिलाफ पेश किया है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट से याचिका वापस लेते हुए समझौते के तहत विवाद खत्म करने की जानकारी दी। कोर्ट के आदेश के पालन में समझौता पेश हुआ है।