ग्वालियर

‘आयुष्मान मरीजों’ के लिए राहत भरी खबर, 36 निजी अस्पतालों में इलाज शुरू

Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान योजना के तहत इलाज फिर से शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर सहित आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को फायदा मिलेगा।

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Ayushman Bharat Scheme (Photo Source - Patrika)

Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। ग्वालियर के करीब 36 निजी अस्पतालों में एनएबीएच (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) सर्टिफिकेट न होने के कारण आयुष्मान से इलाज ठप पड़ गया था। अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आयुष्मान भारत निरामय के आदेश पर एनएबीएच प्रमाण-पत्र नवीनीकरण के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय दे दिया गया है। इसके बाद सभी प्रभावित अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज फिर से शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर सहित आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को फायदा मिलेगा।

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गुणवत्ता का गारंटर है एनएबीएच प्रमाण-पत्र

आयुष्मान भारत योजना के नियमों के अनुसार, पैनल में शामिल हर अस्पताल के पास एनएबीएच सर्टिफिकेट अनिवार्य है। यह प्रमाण-पत्र अस्पताल की सुविधाओं, उपकरणों और मरीज सुरक्षा की गुणवत्ता की गारंटी देता है।

छोटे अस्पतालों पर सबसे ज्यादा असर

जिले में कुल 60 से अधिक निजी अस्पताल आयुष्मान कार्डधारियों का इलाज करते हैं। इनमें सबसे ज्यादा भीड़ छोटे अस्पतालों में रहती है, जहां ग्रामीण और शहरी गरीब परिवार भरोसा करते हैं। बड़े कॉरपोरेट या फाइव-स्टार अस्पतालों के पास पहले से ही फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट होता है।

अब छह महीने में पूरी करनी होंगी कमियां

नए आदेश के बाद अस्पतालों को अपनी कमियों को दूर करने के लिए 6 महीने का समय मिल गया है। इस दौरान मरीजों को इलाज में कोई परेशानी नहीं होगी और आयुष्मान कार्ड से इलाज सुचारू रूप से चलता रहेगा। डॉ. राकेश रायजादा, प्रदेशाध्यक्ष, मध्य प्रदेश नर्सिंगहोम एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है।

क्या है आयुष्मान भारत योजना

आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) भारत सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना है, जो सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती मरीज का खर्च कवर करती है।

ये भी जानिए

कवरेज: प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख (परिवार के आकार या उम्र पर कोई सीमा नहीं)।
लाभार्थी: सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 के आधार पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लगभग 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और वंचित परिवार।
कैशलेस और पेपरलेस: लाभार्थियों को अस्पताल में भर्ती होने पर कोई नकद भुगतान नहीं करना पड़ता।
कवर की गई बीमारियां: इसमें सर्जरी, मेडिकल उपचार, डे-केयर, कैंसर, हृदय रोग जैसी विभिन्न बीमारियों के लिए पैकेज शामिल हैं।

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Updated on:
17 Apr 2026 06:18 pm
Published on:
17 Apr 2026 01:23 pm
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