हमीरपुर

Hamirpur News: लैपटॉप-रजिस्टर में छिपा 7 करोड़ का खेल, 1 गिरफ्तारी से खुला 2000 फर्जी कंपनियों का राज

GST Fraud Arrest:हमीरपुर में पुलिस ने जीएसटी फर्जीवाड़े के अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में 2000 फर्जी कंपनियों के जरिए 7 करोड़ की टैक्स चोरी सामने आई। लैपटॉप, मोबाइल और दस्तावेजों से अहम साक्ष्य मिले।
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Updated: 28 Mar 2026, 7:56 PM IST
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जीएसटी फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपी और बरामद सामान (फोटो -सोशल मीडिया)

हमीरपुर। जिले में फर्जी जीएसटी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। थाना कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी टीम और सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के एक शातिर सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के पास से 4 लैपटॉप, 5 मोबाइल फोन और 2 रजिस्टर बरामद हुए हैं, जिनमें फर्जीवाड़े के चौंकाने वाले राज छिपे मिले।

ऐसे चलता था फर्जी कंपनियों का खेल

गिरफ्तार आरोपी की पहचान अविनाश दुबे (22)निवासी ग्राम जगदीशपुर सिंधवारी आनन्दनगर थाना फरेंदा जनपद महाराजगंज के रूप में हुई है, जो मूल रूप से महाराजगंज का निवासी है और वर्तमान में उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर इलाके में रह रहा था। पुलिस ने 27 मार्च 2026 को उसे हिरासत में लिया, जब जांच में उसके पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों में बड़े स्तर के फर्जीवाड़े के पुख्ता साक्ष्य मिले।जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके साथी फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोगस फर्म बनाकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराते थे। इसके बाद बिना किसी वास्तविक लेन-देन के कागजों में खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पासऑन किया जाता था, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया जा रहा था।

रजिस्टर और लैपटॉप ने खोले राज

बरामद रजिस्टरों ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। छोटे रजिस्टर में अन्य लोगों के हस्ताक्षर की नकल कर उन्हें डिजिटल रूप में इस्तेमाल करने का तरीका दर्ज था, जबकि बड़े रजिस्टर में सैकड़ों फर्जी कंपनियों का पूरा हिसाब-किताब मौजूद मिला। लैपटॉप की जांच में भी फर्जी जीएसटी आवेदन और कूटरचित दस्तावेजों के डिजिटल प्रमाण मिले हैं।

नौकरी के नाम पर ठगी, दस्तावेजों का दुरुपयोग

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने करीब 2000 फर्जी कंपनियां बनाकर 7 करोड़ रुपये से अधिक की आईटीसी पासऑन कर टैक्स चोरी की है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से आधार, पैन, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेज जुटाते थे और उन्हीं के जरिए यह फर्जीवाड़ा अंजाम देते थे।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

मामले में दो अन्य साहित समेत कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस इलेक्ट्रॉनिक डाटा और कॉल डिटेल्स के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है।

Updated on:
28 Mar 2026, 7:56 PM IST
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