Medical Negligence:हमीरपुर में उल्टी-दस्त से पीड़ित पांच माह के मासूम की जिला अस्पताल में कथित इलाज न मिलने से मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
हमीरपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। कुरारा क्षेत्र से जिला अस्पताल तक इलाज की आस में भटकते रहे एक पांच माह के मासूम ने आखिरकार दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि समय पर डॉक्टर ने बच्चे को देखा तक नहीं, जिससे उसकी जान चली गई।
कुरारा निवासी अमित अनुरागी के अनुसार, उनके पांच माह के पुत्र शिवा को पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। शनिवार को हालत बिगड़ने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुरारा में भर्ती कराया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
अमित बताते हैं कि रात करीब नौ बजे वह एंबुलेंस से बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन यहां जो हुआ, उसने परिवार को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने बच्चे को देखने की बजाय परिजनों को एक सिरप देने की सलाह दी। परिजनों ने दवा पिला दी, लेकिन इसके बाद भी बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। परिवार का कहना है कि वे पूरी रात अस्पताल में डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे, लेकिन किसी ने बच्चे को देखने की जरूरत नहीं समझी। रविवार को अवकाश होने के कारण इमरजेंसी में ही डॉक्टर उपलब्ध रहने की जानकारी थी, लेकिन वहां भी कोई ठोस इलाज नहीं मिला।
हताश होकर परिजन बच्चे को लेकर घाटमपुर के एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां इलाज के बाद कुछ समय के लिए राहत मिली। रविवार शाम को वे बच्चे को लेकर घर लौट आए। लेकिन सोमवार सुबह अचानक उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। परिजन उसे दोबारा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मासूम की मौत के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। मां कोमल अनुरागी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर इलाज मिल जाता, तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी।
इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी गीतम सिंह ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। यदि डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।