Elderly Abuse Cases: 'दिल के फफोले जल उठे सीने के दाग से, इस घर को आग लग गई घर के चिराग से' यह पंक्तियां उन बुजुर्गों के दर्द का बयान है जिनको अपना खून ही खून के आंसू रुला रहा है। ढलती उम्र में उनको थाने-कचहरी की सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं। क्योंकि जिनको अंगुली पकड़ कर कभी चलना सिखाया था, वो अब कलाई मरोड़ कर गिराना चाहते हैं।
Hanumangarh News: अपनों से जख्म खाए ऐसे बुजुर्ग कभी एसपी तो कभी कलक्टर दफ्तर जाकर मरहम की गुहार लगा रहे हैं। पिछले डेढ़ माह में ही पांच बुजुर्ग बहू-बेटों की प्रताड़ना से तंग होकर मदद मांगने आ चुके हैं। यह तो केवल वह घटनाएं हैं जो सामने आ गई, अधिकांश बुजुर्गों की पीड़ा तो घर की चारदीवारी के भीतर ही घुटकर रह जाती है। ज्यादातर बुजुर्ग सामाजिक बदनामी, पारिवारिक टूटन और बच्चों के भविष्य की चिंता के कारण प्रताड़ना सहने के बावजूद शिकायत नहीं करते। हालांकि पुलिस कानूनी कार्रवाई के साथ ही मानवीयता के लिहाज से भी बुजुर्गों की सहायता करने का प्रयास करती है। गत दिनों एसपी नरेन्द्रसिंह मीणा ने पीलीबंगा और तलवाड़ा झील थाना क्षेत्र के ऐसे दो मामलों में बुजुर्गों को राहत दिलाई थी।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत बुजुर्ग अपने बच्चों से भरण-पोषण मांग सकते हैं। यदि संतान संपत्ति लेने के बाद माता-पिता की देखभाल नहीं करती तो संपत्ति वापस लेने का भी प्रावधान है। वरिष्ठ नागरिक हनुमानगढ़ जिला स्तरीय ट्रिब्यूनल में आवेदन कर राहत पा सकते हैं। पुलिस और प्रशासन को भी ऐसे मामलों में त्वरित सहायता देने के निर्देश हैं।
सम्पत्ति के लिए पिता को नशा मुक्ति केन्द्रों में बंधक बनवाने के मामले भी कुछ साल पहले सामने आ चुके हैं जिनमें हनुमानगढ़ टाउन थाना पुलिस ने कार्रवाई कर 2 बुजुर्गों को मुक्त कराया था। 70 वर्षीय तथा पैंसठ वर्षीय बुजुर्ग ने पुत्रियों, दामाद तथा पुत्रों पर जमीन के लिए जबरन भर्ती कराने व बंधक बनाकर यातना देने के आरोप लगाए थे।
बुजुर्गों को प्रताड़ित करने के 2 मामले गत दिनों सामने आए तो तत्काल संबंधित थाना प्रभारियों को कार्रवाई का आदेश दिया। पुलिस सहायता के लिए तत्पर है। थाना प्रभारियों को भी संवेदनशीलता से ऐसे मामलों में शीघ्रता से न्यायोचित कार्रवाई के लिए कह रखा है।
-नरेन्द्रसिंह मीणा, जिला पुलिस अधीक्षक
अगर कोई मकान वगैरह माता-पिता अपनी संतान के नाम कर दे और बाद में संतान माता-पिता को प्रताड़ित करे एवं भरण-पोषण आदि ना करे तो संपत्ति वापस ली जा सकती है। न्यायालय के आदेश पर रजिस्ट्री खारिज हो सकती है। लोगों को इसका पता नहीं होने के कारण अक्सर बुजुर्ग प्रताडऩा व अपमान सहने को विवश हो जाते हैं। उनको कानून की शरण लेनी चाहिए ताकि सम्मान से जीवन जी सके।