
हनुमानगढ़: शादी-ब्याह की दावत हो या धार्मिक और सामाजिक आयोजन, केवल स्वादिष्ट भोजन बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। भोजन परोसने से पहले उसके पीछे वैध दस्तावेज भी होने जरूरी होंगे। हनुमानगढ़ जिले में अब बिना एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण वाले हलवाई और कैटरर सार्वजनिक आयोजनों में भोजन तैयार या परोस नहीं सकेंगे।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करते हुए आयोजकों, कैटर्स और आयोजन स्थल संचालकों की जवाबदेही तय कर दी है। नियमों की अनदेखी करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई होगी।
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशों के तहत जिले में विवाह समारोह, धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन तथा अन्य सार्वजनिक आयोजनों में खाद्य सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी।
आयोजन से पहले आयोजक अथवा कैटरर को कार्यक्रम की तिथि, समय, स्थल, आयोजक का नाम, मोबाइल नंबर, कैटरर का नाम, एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या, संभावित अतिथियों की संख्या तथा भोजन तैयार व परोसने के स्थान की जानकारी संबंधित अभिहित अधिकारी को देनी होगी।
बड़े आयोजनों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी जोखिम आधारित निरीक्षण करेंगे। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, खाद्य पदार्थों के भंडारण, तापमान नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन की जांच होगी। आवश्यकता पड़ने पर खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जाएंगे।
विभाग की ओर से जिले के सभी हलवाई, कैटर्स एवं खाद्य व्यवसाय संचालकों का सत्यापन किया जाएगा। बिना वैध लाइसेंस या पंजीकरण के कार्य करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं मैरिज गार्डन, बैंक्वेंट हॉल, होटल, धर्मशाला, सामुदायिक भवन और फार्म हाउस संचालकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां केवल लाइसेंसधारी खाद्य व्यवसाय संचालक ही सेवाएं देंगे।