हनुमानगढ़

Eye Donation: हनुमानगढ़ में नेत्रदान की राह बंद, आई सेंटर नहीं खुलने से नहीं पहुंच रही जरूरतमंदों तक रोशनी

हनुमानगढ़ जिले में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल होने के बावजूद आई कलेक्शन सेंटर नहीं होने से नेत्रदान की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जागरूकता के बावजूद लोग आंखें दान नहीं कर पा रहे, जबकि एक नेत्रदान से दो लोगों को रोशनी मिल सकती है।

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हनुमानगढ़ में नेत्रदान की राह बंद। फोटो: ChatGpt

हनुमानगढ़। नेत्रदान महादान का संदेश वर्षों से लोगों को जागरूक करने के लिए दिया जा रहा है, लेकिन भटनेर अंचल में हालात ऐसे हैं कि इच्छा होने के बावजूद लोग नेत्रदान नहीं कर पा रहे। जिले में न तो किसी सरकारी अस्पताल में आई कलेक्शन सेंटर की व्यवस्था है और न ही किसी निजी संस्था के पास अधिकृत सुविधा उपलब्ध है। परिणामस्वरूप मृत्यु के बाद दान की जाने वाली आंखें जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही बेकार हो जाती हैं।

जिले में मेडिकल कॉलेज और टाउन स्थित राजकीय जिला अस्पताल होने के बावजूद नेत्रदान जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का अभाव स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर तस्वीर पेश करता है। मेडिकल कॉलेज में देहदान की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन नेत्रदान की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पाई। वर्षों से केवल जागरूकता अभियान और नारों तक ही यह विषय सीमित है।

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विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद सीमित समय के भीतर आंखों का उत्सारण जरूरी होता है। इसके लिए प्रशिक्षित टीम, अधिकृत आई बैंक और आवश्यक उपकरणों की जरूरत पड़ती है। हनुमानगढ़ जिले में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने से नेत्रदान करने की इच्छा रखने वाले परिवार भी असहाय नजर आते हैं। कई बार लोग अस्पतालों में जानकारी लेने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें दूसरे शहरों का रास्ता बताया जाता है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद उम्मीद जगी थी कि यहां आई बैंक या कम से कम नेत्र उत्सारण केंद्र स्थापित होगा, ताकि स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध हो सके। लेकिन अब तक कागजी कार्रवाई ही चल रही है।

एक का नेत्रदान, दो को रोशनी

एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी में रोशनी लाई जा सकती है। जिले में यदि आई बैंक या आई कलेक्शन सेंटर केंद्र स्थापित हो जाए तो इच्छा अनुसार मरणोपरांत आंखों का दान किया जा सकेगा।

आई कलेक्शन सेंटर खुलने का इंतजार

बीकानेर मेडिकल कॉलेज की टीम ने हनुमानगढ़ जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में आई कलेक्शन सेंटर खोलने को लेकर निरीक्षण किया था। निरीक्षण दल ने कलेक्शन सेंटर खोलने के लिए दो चिकित्सक व एक नर्सिंग कर्मी को सात दिवसीय प्रशिक्षण दिलाने के लिए बीकानेर भेजने के निर्देश दिए थे। फिलहाल अस्पताल प्रशासन सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के पत्र का इंतजार है।

ऐसे होता है नेत्रदान

हनुमानगढ़ में कॉर्नियल कलेक्शन सेंटर खुलने के पश्चात मेडिकल कॉलेज की टीम सूचना मिलने पर मृत्यु के छह घंटे के भीतर कॉर्निया एकत्रित करेगी। इसके पश्चात नवां बाइपास पर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के कॉर्नियल कलेक्शन सेंटर में प्रीर्जव किया जा सकेगा और यहां से बीकानेर आई बैंक में भिजवाया जाएगा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में कॉर्नियल कलेक्शन सेंटर में 24 या फिर 48 घंटे प्रीर्जव रखने की सुविधा होगी। उक्त समय के अंतराल में आई बैंक में भेजना होगा। कॉर्निया 80 वर्ष की आयु तक ही लिया जाता है।

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर को पत्र लिखकर स्टॉफ को प्रशिक्षण दिलाने का आग्रह किया जा चुका है। पत्र का जवाब आते ही चिकित्सक व नर्सिंग कर्मी को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा और साथ ही आई कलेक्शन सेंटर खोलने की अन्य कार्यवाही शुरू की जाएगी। -डॉ. शंकर सोनी, पीएमओ, जिला अस्पताल।

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