Social Media Misuse: कभी एक अप्रेल हल्के-फुल्के मजाक का दिन माना जाता था। मगर सोशल मीडिया के इस दौर में प्रैंक्स और झूठी सूचनाएं फैलाने का मानों आसान जरिया बन गया है।
Social Media Misuse: कभी एक अप्रेल को हल्के-फुल्के मजाक का दिन माना जाता था। मगर सोशल मीडिया के इस दौर में प्रैंक्स और झूठी सूचनाएं फैलाने का मानों आसान जरिया बन गया है। कोई मजाक में नहीं बल्कि साजिशन, फेमस होने और सोशल मीडिया पर छाने की मंशा से भी किया जा रहा है। ऐसे ही डिजिटली फूल बनाना कई बार न केवल खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी नुकसान का सबब बन जाता है।
हनुमानगढ़ जिले की बात करें तो एक साल में 4 बार प्रशासन को धमकी भरी ई-मेल मिल चुकी हैं जिनमें कलक्ट्रेट एवं मुख्य डाक घर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। हालांकि पुलिस पड़ताल में यह सारी धमकियां झूठी पाई गई। मगर इससे पुलिस प्रशासन की अच्छी-खासी परेड हो गई तथा सरकारी धन व समय की बर्बादी भी हुई। इसके अलावा जनता के कामकाज भी अटक गए।
सूचना का अधिकार जागृति मंच के जिलाध्यक्ष प्रवीण मेहन बताते हैं कि झूठी सूचनाएं सोशल मीडिया पर फैलाना एक रोग बन चुका है। इस पर शासन-प्रशासन का ध्यान भी विशेष परिस्थितियों ही जाता है। मसलन, कोरोना काल में फेक सूचनाओं ने प्रशासन को बहुत परेशान किया। कई लोगों पर तब कार्रवाई भी हुई। यह सिलसिला निरंतर चलता रहना चाहिए ताकि झूठ फैलाने वालों पर अंकुश लग सके।
जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष में बरसों तक सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त सहायक उप निरीक्षक शेरसिंह भांभू बताते हैं कि कंट्रोल रूम में दिन में कई फोन ऐसे आते थे जिनमें लोग पुलिस से ही मजाक करते थे। जैसे कि कॉल करने वाले कहते कि क्या आपने कभी भूत देखा है या फिर मेरा ब्याह नहीं हो रहा, समाधान करवाइए। कई बार लोग अपनी निजी पीड़ा भी शेयर करते। जिसे सुनकर उसे दिलासा देते।
किसी सरकारी संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल भेजने के गत एक वर्ष में चार मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल 14 अप्रेल को तथा 14 दिसम्बर को हनुमानगढ़ सहित प्रदेश के अन्य जिला कलक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी भरी ई-मेल मिल चुकी है। इसके बाद इस साल मार्च में दो बार ऐसी धमकी मिल चुकी है जिनमें मुख्य डाक घर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इसमें पहली धमकी 10 मार्च को तथा दूसरा धमकी भरा ई-मेल 27 मार्च को मिला। हालांकि पड़ताल में धमकियां झूठी निकली थी और कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी।
एडवोकेट हनीश ग्रोवर बताते हैं कि सोशल मीडिया पर अफवाह, झूठी खबर या भ्रामक जानकारी फैलाने पर भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर जेल, भारी जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पुलिस आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज कर सकती है।