
हरदोई. योगी और मोदी सरकार में जब पुलिस अफसरों को ही स्वास्थ्य विभाग तब्बजो नही देता तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिलेगी। शायद यही कारण है कि हरदोई में कही बेबश पिता को बच्चे के शव को ले जाने के गिड़गिड़ाने के बाद भी वाहन नही मिलता तो कहीं मरीजों को डॉक्टर और स्ट्रेचर नहीं मिलते। ऊपर से तुर्रा यह कि CMO हरदोई योगी सरकार पर ही ताने कसने लगते हैं।
मुख्यमंत्री पर ही सवाल उठाने वाले हरदोई के CMO का कहना है कि पब्लिक से मुझे क्या काम पब्लिक के अस्पताल है CMO आफिस नही। जिले में स्वास्थ्य विभाग के इस आला अफसर को ही जब जनता से सरोकार नही है तो फिर जाहिर सी बात है कि पब्लिक की कौन सुने। योगी सरकार की मंशा पर भ्रष्टाचार की मोटी परत इस तरह जमी है कि आम आदमी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर परेशान है। इसकी बानगी पुलिस अफसरों ने भी महसूस की जब उनके फोन करने के बाद भी SP आफिस एंबुलेंस नही आई और नहीं CMO हरदोई का CUG मोबाइल नंबर पर काल रिसीव हुई।
यह है पूरा मामला
पुलिस अधीक्षक आफिस में उस समय हड़कंप मच गया जब खून से लथपथ लोग पुलिस विभाग के आलाधिकारियों को अपनी पीड़ा सुनाने के लिये लोगों का सहारा लेकर पहुंच गए। जब इसकी सूचना अधिकारियों को मिली तो एएसपी पूर्वी और पश्चिमी खुद चलकर जमीन में पड़े घायलो के पास पहुंच गए और पूरे मामले की जानकारी लेकर उनको सरकारी गाड़ी से उपचार के लिये जिला अस्पताल भेजा।
मामला मंझिला थाना क्षेत्र के गांव अन्था प्रधान का है, जहां पर रहने वाले दो परिवारों के बीच में किसी बात को लेकर जमकर मारपीट हो गई थी। जिसमें दोनों पक्षों को मिलाकर करीब एक दर्जन से ऊपर लोग घायल हो गए थे। जिसके बाद दोनों पक्षों ने थाने पर भी शिकायत की मगर थाने पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई ना ही उनका डॉक्टरी परीक्षण कराया गया। जिसके बाद पीड़ित पक्ष के आधा दर्जन से ऊपर घायलों ने ग्रामीणों के साथ पुलिस ऑफिस पहुंच गए और खून से लथपथ जमीन में लेट गए। इस बात की सूचना जैसे ही एएसपी पूर्वी ज्ञानजय सिंह व एएसपी पश्चिमी निधि सोनकर को मिली तो दोनों लोग घयलो के पास पहुंच गये। उन्होंने घायलो को काफी समझा बुझाकर उनकी तहरीर लेकर सभी उपचार के लिये जिला अस्पताल में भर्ती कराया।