
हरदोई. गांव की रहने वाली पार्वती की सफलता की कहानी ने उन्हें प्रेणात्मक, रचनात्मक और सफल व्यक्तित्व के रूप में पहचान दी है। वे अनुसूचित जाति के गरीब परिवार से हैं और उनकी पांच संताने हैं जिनमें 3 बेटियां एवं दो बेटे हैं। उनके मामा के विकलांग होने के कारण वह पिछले 25 वर्षों से अपने पति के साथ उनकी सेवा के लिए अपने मामा के घर रह रही है। उन्हें राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पार्वती जो अत्यन्त ही गरीब है उन्हें राजीव गांधी महिला विकास परियोजना द्वारा 25 जनवरी 2011 में स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया। पार्वती लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह में कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले पार्वती का कार्य केवल गृह कार्य तक सीमित थी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के उपरान्त उन्होंने लखनऊ, रायबरेली, आन्ध्र प्रदेश, बिहार, में शि़क्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार एवं महिला सशक्तिकरण पर विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त किये और राजीव गांधी महिला विकास परियोजना में कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य कर रही हैं। पार्वती अपनी तीन बेटियों को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्नातक उत्तीर्ण कराया एवं अपनी पहली बेटी को स्वरोजगार हेतु कामर्सियल सिलाई मशीन प्रदान किया।
ग्रहणी ग्रामीण से ट्रेनर तक की कहानी खुद लिखी
जब पार्वती विवाहित होकर आयी तब वह गृह कार्य तक ही सीमित थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात स्वयं भी सशक्त हुई और अपने जैसे अन्य गरीब परिवार की गृहणी महिलाओं को भी समाज की विभिन्न बंदिशों से मुक्त कराकर मुख्यधारा से जोड़ा।
विवाहित महिला पार्वती ने स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रशिक्षण लखनऊ में लिया तथा उन सभी गरीब महिलाओं को उनके ही पंचायत एवं ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की जानकारी दी। गर्भवती को गर्भपात की जानकारी, प्रसव समय एवं पीड़ा की जानकारी, स्वास्थ्य एवं बाल पोषण की जानकारी, नवजात बच्चों पालन पोषण की जानकारी और स्वच्छता एवं सफाई की जानकारी देंने का कार्य किया।
यहां से लिया प्रशिक्षण और फिर खुद देने लगी ट्रेंनिग
पशुपालन, स्वास्थ्य, सीआरपी, मीटिंग सखी, आजीविका (बिहार), सीआरपी आंध्र प्रदेश से प्रशिक्षण लेकर पार्वती द्वारा विगत पांच वर्षों में लगभग 100 समूहों का गठन कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा गया है। सौ समूहों में लगभग 1200 महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में विशेष भूमिका निभाई जिससे 1200 परिवारों में समृद्धि व खुशहाली आयी है जो कि प्रशंसा योग्य है।
बालिकाओं महिलाओं के उत्थान हेतु किया गया योगदान उन्हें सरहनीय बनाता है। पार्वती ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई महिलाओं के बालिकाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर विशेष योगदान दिया। समूह से जुड़ी हुई महिलाओं की बेटियों को शिक्षा के महत्व को समझाया और उनको विद्यालय जाने हेतु प्रेरित किया। किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य पर विभिन्न प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्य की जानकारी दी। पार्वती ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आजीविका मिशन की ओर से प्रेरक के रूप में जाकर लगभग 100 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया तथा उनके द्वारा ग्रामीण परिवार की महिलाओं को निम्नलिखित स्वरोजगार परक से समूहों के माध्यम से जोड़ा, कुल लगभग 1200 गरीब महिला परिवारों को समूह से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में लाक? रोजगार र के अवसर प्रदान किये।