
Office Sitting Job Health Tests: सुबह ऑफिस पहुंचते ही कुर्सी पर बैठना और फिर लंच या चाय के बहाने ही उठना… अगर आपकी नौकरी भी ऐसी है, तो दिन के 8 से 9 घंटे कब बैठे-बैठे निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। शाम को कमर अकड़ना या शरीर भारी लगना आम बात लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठने की आदत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, ज्यादा समय बैठे रहने की आदत हृदय रोग और स्ट्रोक के अधिक जोखिम से जुड़ी पाई गई है। ऐसे में केवल जिम जाना ही काफी नहीं, बल्कि शरीर के कुछ जरूरी हेल्थ नंबरों पर भी नजर रखना समझदारी हो सकती है।
ऑफिस में लगातार बैठने वाले लोगों को अपने ब्लड प्रेशर की जानकारी जरूर होनी चाहिए। AHA के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर के अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं होते। अगर ब्लड प्रेशर सामान्य यानी 120/80 mm Hg से कम है, तो सामान्य तौर पर साल में कम से कम एक बार जांच कराने की सलाह दी जाती है।
बाहर का खाना, कम चलना और दिनभर कुर्सी पर रहना, ऑफिस लाइफ में ये आदतें आम हो सकती हैं। लिपिड प्रोफाइल जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जानकारी मिलती है। नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, 20 से 65 साल के कम उम्र वाले वयस्कों में सामान्य तौर पर हर 5 साल में कोलेस्ट्रॉल जांच की गाइड दी गई है। जोखिम के अनुसार डॉक्टर इसे जल्दी भी करा सकते हैं।
मीठा तो ज्यादा खाता ही नहीं, शुगर कैसे होगी? यह सोचना सही नहीं है। यूएस प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स (USPSTF) 35 से 70 वर्ष के अधिक वजन या मोटापे वाले वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की जांच की सलाह देती है। इसके लिए फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c जैसी जांच की जा सकती है।
कई बार वजन धीरे-धीरे बढ़ता है और हमें पता तब चलता है, जब पुराने कपड़े टाइट होने लगते हैं। AHA के अनुसार, शरीर का वजन और BMI हृदय से जुड़े जोखिम को समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि केवल BMI ही पूरी सेहत की तस्वीर नहीं बताता।
अगर वजन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन पेट बाहर निकलने लगा है, तो कमर का घेरा भी ध्यान देने वाला नंबर है। AHA के अनुसार, कमर की माप, शरीर में चर्बी के फैलाव और वजन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम को समझने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।