
लोग टाल देते हैं Colon Cancer के ये संभावित संकेत (photo- freepik)
Colon Cancer Symptoms: क्या पिछले कुछ समय से आपकी टॉयलेट की आदत अचानक बदल गई है? कभी लगातार कब्ज, कभी दस्त या शौच के बाद भी लगता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ। अक्सर लोग इसे खराब खानपान, गैस या बवासीर समझकर टाल देते हैं। लेकिन अगर ऐसी परेशानी लगातार बनी रहे, तो इसकी जांच जरूरी हो सकती है।
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) और Mayo Clinic के अनुसार, कोलन कैंसर बड़ी आंत के ऊतकों में शुरू होता है। शुरुआती दौर में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर मल और टॉयलेट की आदतों में कुछ बदलाव नजर आ सकते हैं।
टॉयलेट करते समय मल में चमकीला लाल या बहुत गहरा खून दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें। खून आने की वजह बवासीर जैसी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए केवल लक्षण से कैंसर मान लेना सही नहीं है।
कभी-कभार कब्ज या दस्त सामान्य हो सकते हैं। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के bowel habits लगातार बदल रही हैं, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है। NCI इसे कोलन कैंसर के संभावित संकेतों में शामिल करता है।
शौच करने के बाद भी बार-बार ऐसा लगे कि आंत पूरी तरह खाली नहीं हुई है, तो इस बदलाव पर ध्यान दें। खासकर तब, जब यह समस्या लंबे समय से बनी हुई हो।
क्या आपका मल पहले की तुलना में पतला या अलग आकार का दिखाई देने लगा है? NCI के अनुसार, stool shape में लगातार बदलाव भी जांच की वजह बन सकता है।
गैस, पेट फूलना, भारीपन या पेट में बार-बार ऐंठन होना कई सामान्य कारणों से हो सकता है। लेकिन जब परेशानी लगातार बनी रहे और साथ में bowel habits भी बदलें, तो इसे सिर्फ गैस समझकर न टालें।
अगर आपने न डाइट बदली है और न ही ज्यादा एक्सरसाइज शुरू की है, फिर भी वजन लगातार कम हो रहा है, तो डॉक्टर से इसकी वजह जानना जरूरी है। NCI और Mayo Clinic दोनों बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना को संभावित लक्षणों में बताते हैं।
पर्याप्त नींद के बाद भी लगातार थकान और कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे केवल काम का तनाव न समझें। लगातार रक्तस्राव जैसे कारण शरीर में कमजोरी बढ़ा सकते हैं।
NCI के अनुसार, बढ़ती उम्र, परिवार में कोलन या रेक्टल कैंसर का इतिहास, कुछ प्रकार के कोलन पॉलीप्स, लिंच सिंड्रोम या एफएपी जैसे वंशानुगत आनुवंशिक परिवर्तन, लंबे समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोहन रोग, धूम्रपान और मोटापा जैसे कारक खतरे को बढ़ा सकते हैं। जोखिम कारक होने का मतलब यह नहीं कि कैंसर जरूर होगा।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
11 Jul 2026 12:08 pm
Published on:
11 Jul 2026 12:08 pm
