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ICU में मरीज को कब रखा जाता है, NHS ने बताया कब पड़ती है Intensive Care की जरूरत

Intensive Care Unit Hindi: अस्पताल में मरीज को आईसीयू (ICU) में कब शिफ्ट किया जाता है? NHS के मुताबिक जानिए किन गंभीर परिस्थितियों में पड़ती है इंटेंसिव केयर की जरूरत और यह नॉर्मल वॉर्ड से कैसे अलग होता है।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Updated: 11 Jul 2026, 7:00 AM IST

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आईसीयू एक ऐसा स्पेशल वॉर्ड जहां मरीज पर 24 घंटे कड़ी नजर रखी जाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Intensive Care Unit Use: अस्पताल में जब भी डॉक्टर कहते हैं कि मरीज को आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ेगा, तो अक्सर घरवाले डर जाते हैं और उन्हें लगता है कि स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ चुकी है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। आईसीयू का मतलब होता है इंटेंसिव केयर यूनिट (Intensive Care Unit), यानी एक ऐसा स्पेशल वॉर्ड जहां मरीज पर 24 घंटे नजर रखी जाती है ताकि उसकी जान बचाई जा सके।

एनसीबीआइ के मुताबिक, आईसीयू में मरीज को सिर्फ तब रखा जाता है जब उसके शरीर के मुख्य अंग ठीक से काम नहीं कर रहे होते हैं। आइए समझते हैं कि डॉक्टर किन परिस्थितियों में मरीज को आईसीयू में भर्ती करते हैं। NHS के अनुसार, मरीजों को आईसीयू में रखने की मुख्य वजहें निम्नलिखित होती हैं;

1. गंभीर एक्सीडेंट या गहरी चोट (Serious Trauma)

अगर किसी इंसान का बहुत भयानक एक्सीडेंट हो जाए, सिर पर गहरी चोट लगे, या शरीर से बहुत ज्यादा खून बह जाए, तो उसे तुरंत आईसीयू में रखा जाता है। ऐसे मामलों में मरीज के अंगों को फेल होने से बचाने के लिए तुरंत निगरानी जरूरी होती है।

2. अचानक आई कोई गंभीर बीमारी

3. सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होना

अगर किसी मरीज के फेफड़े इतने कमजोर हो जाएं कि वह खुद से सांस न ले पा रहा हो (जैसे गंभीर निमोनिया या अस्थमा अटैक में), तो उसे आईसीयू में वेंटिलेटर (सांस देने वाली मशीन) के सपोर्ट पर रखा जाता है।

4. किसी बड़े ऑपरेशन के बाद (Major Surgery)

कई बार बहुत बड़े ऑपरेशनों (जैसे ओपन हार्ट सर्जरी, ब्रेन सर्जरी या ट्रांसप्लांट) के तुरंत बाद मरीज को कुछ घंटों या दिनों के लिए आईसीयू में रखा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि सर्जरी के बाद मरीज का शरीर कैसे रिकवर कर रहा है।

5. नॉर्मल वॉर्ड से कैसे अलग होता है ICU?

एनएचएस (NHS) के मुताबिक इसमें आईसीयू में मरीज के बिस्तर के पास बहुत सारी आधुनिक मशीनें होती हैं। ये मशीनें हर सेकंड मरीज के दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल और सांसों को नापती रहती हैं। अगर कुछ भी ऊपर-नीचे होता है, तो तुरंत अलार्म बज जाता है। नॉर्मल वॉर्ड में एक नर्स कई मरीजों को देखती है, लेकिन आईसीयू में हर एक या दो मरीज पर एक नर्स होती है, जो रिपोर्ट डॉक्टर तक पहुंचाती है।

क्या ICU में जाना हमेशा खतरे की घंटी है?

बिल्कुल नहीं! आईसीयू का मतलब यह नहीं है कि अब कोई उम्मीद नहीं बची है। बल्कि इसका मतलब यह है कि मरीज को ठीक करने के लिए अस्पताल की सबसे बेहतरीन तकनीक और डॉक्टर दिन-रात काम कर रहे हैं। जैसे ही मरीज की हालत स्थिर (स्टेबल) होती है, डॉक्टर उसे वापस नॉर्मल वॉर्ड में शिफ्ट कर देते हैं। इसलिए घबराएं नहीं, सही जानकारी ही सही हौसला देती है!

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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