स्वास्थ्य

वर्क फ्रॉम होम में करना पड़ रहा 60 घंटे अतिरिक्त काम, बढ़ रहा मानसिक तनाव

- 8 देशों में सर्वे, काम व पारिवारिक संतुलन बनाने में हो रही दिक्कत- माइक्रोसॉफ्ट वर्क ट्रेंड इंडेक्स के अनुसार देश में 29 फीसदी परेशान

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Mar 17, 2021
वर्क फ्रॉम होम में करना पड़ रहा 60 घंटे अतिरिक्त काम, बढ़ रहा मानसिक तनाव
वर्क फ्रॉम होम में करना पड़ रहा 60 घंटे अतिरिक्त काम, बढ़ रहा मानसिक तनाव

नई दिल्ली। कोरोना महामारी की वजह से काफी संख्या में कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल कनेक्टिविटी बढऩे की वजह से किसी भी समय मीटिंग व किसी भी समय काम की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इससे उन्हें महीने में 60 घंटे अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। इससे उनमें काम व पारिवारिक संतुलन बनाने में दिक्कत हो रही है। माइक्रोसॉफ्ट वर्क ट्रेंड इंडेक्स के अनुसार एशियाई देशों में दूसरे नंबर पर भारत में सबसे अधिक 29 फीसदी लोग परेशान हैं। आठ देशों में किए सर्वे में करीब 6000 कर्मचारियों को शामिल किया गया था।

लगातार ऑनलाइन मीटिंग से बढ़ती है थकान-
लगातार कई ऑनलाइन मीटिंग से थकान बढ़ती है। इससे तनाव व कर्मचारी की कार्य क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इसलिए कंपनियां अपने कर्मचारियों को वापस ऑफिस में बुलाने के लिए कह रही हैं।

ध्यान करें: सर्वे में 10 में से 7 लोगों ने कहा कि ध्यान से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं शिक्षण कार्यों से जुड़े लोग जो वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे, उनमें यह आंकड़ा 83 फीसदी तक है। इससे नकारात्मक प्रतिक्रिया में भी कमी आती है।

पोषणयुक्त आहार लें और व्यायाम करें-
शारीरिक व मानसिक सेहत के लिए पोषणयुक्त आहार जरूरी है क्योंकि तनाव न सिर्फ मस्तिष्क बल्कि शरीर को भी प्रभावित करता है। मौसमी फलों, सब्जियों, साबुत अनाज का प्रयोग करें। इससे रोग प्रतिरोधकता मजबूत होती है। पोषण की कमी से थकान, सिरदर्द हो सकता है। नियमित व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है। यह मूड को अच्छा रखता है।

4-7-8 तकनीक -
इसे रिलेक्सिंग ब्रीद भी कहते हैं। इसमें 4 सेकंड तक सांस अंदर ली जाती है। 7 सेकंड तक सांस को रोका जाता है। 8 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस छोड़ते हैं। इससे दबाव, तनाव में कमी व नींद बेहतर आती है।
घर में कोना बनाएं -
घर में ऐसी जगह हो, जो शांति व हवादार हो। जहां से ऑफिस संबंधित काम को अच्छे से अंजाम दे सकें।
दोषी महसूस न करें-
किसी गड़बड़ी के लिए अपरोध बोध का विचार मन में न पालें। उसमें सुधार व बेहतर तरीके से करने की सोचें।

Published on:
17 Mar 2021 11:40 am