स्वास्थ्य

Acidity During Fasting: व्रत में सीने में जलन और खट्टी डकारें? पबमेड से जानिए खाली पेट क्यों बनती है एसिडिटी और कैसे बचें

Acidity During Fasting: व्रत में सीने में जलन और एसिडिटी से परेशान हैं? पबमेड और ईएमसी से जानिए खाली पेट एसिड क्यों बनता है और कम करने के आसान उपाय।
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Oct 19, 2026
A person holding their chest due to acidity and heartburn during fasting, with herbal tea and natural remedies on the table.
व्रत के दौरान खाली पेट एसिडिटी और सीने की जलन होना आम है, जिसे सही खान-पान और घरेलू नुस्खों से आसानी से शांत किया जा सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Acidity During Fasting: नवरात्रि हो, एकादशी या फिर सावन का सोमवार भगवान की भक्ति में व्रत रखना भारतीय परंपरा का अटूट हिस्सा है। पर क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि व्रत के दिन दोपहर ढलते-ढलते गले में कड़वा पानी आने लगता है? सिर भारी हो जाता है और सीने में ऐसी जलन होती है जैसे अंदर आग जल रही हो? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। दरअसल, हममें से ज्यादातर लोग व्रत रखते समय भक्ति भाव तो पूरा रखते हैं, लेकिन पेट की गणित गड़बड़ा देते हैं। घंटों खाली पेट रहने के बाद एकाएक तला-भुना या कुट्टू की पकौड़ियां खा लेना, या फिर दिन भर बार-बार चाय की चुस्कियां लेना यही वो गलतियां हैं जो व्रत के पुण्य के साथ-साथ एसिडिटी का उपहार भी दे देती हैं। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।

खाली पेट क्यों बनती है एसिडिटी?

पबमेड रिसर्च की मानें तो हमारे पेट में पाचन के लिए हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) लगातार बनता रहता है। जब हम सामान्य दिनों में भोजन करते हैं, तो यह एसिड खाने को पचाने में खर्च हो जाता है। लेकिन जब हम लंबे समय तक कुछ नहीं खाते, तो पेट में खाना तो होता नहीं, पर एसिड का बनना बंद नहीं होता। नतीजा? यह बचा हुआ एसिड पेट की अंदरूनी परत को चाटने लगता है और ऊपर की तरफ खाने की नली (Esophagus) में चढ़ने लगता है। इसी को हम एसिड रिफ्लक्स या बोलचाल में सीने की जलन कहते हैं।

व्रत में हम तीन बड़ी गलतियां करते हैं

  • बार-बार चाय या कॉफी पीना।
  • फलाहार के नाम पर कुट्टू के पकोड़े, साबूदाना वड़ा या बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले वाला फलाहारी नमकीन खाना।
  • कम पानी पीना।

व्रत में एसिडिटी से राहत पाने के ये सावधानियां बरतें

जब भी व्रत खोलें, एक साथ भारी खाना न खाएं। पहले एक गिलास पानी या नारियल पानी पिएं, फिर हल्का फलाहार लें। फलाहार करने के तुरंत बाद बिस्तर पर न लेटें। कम से कम 1 से 2 घंटे तक सीधे बैठें या हल्की चहलकदमी करें। लेटने से पेट का एसिड बहकर गले तक आ जाता है। अगर दोपहर में या रात को सोना हो, तो बाईं करवट (Left Side) सोएं। ईएमसी हेल्थकेयर के मुताबिक, बाईं करवट सोने से पेट की बनावट ऐसी रहती है कि एसिड ऊपर की तरफ रिफ्लक्स नहीं करता।

व्रत का सही अर्थ शरीर और मन को शुद्ध करना है, उसे तकलीफ देना नहीं। अगर आप खाली पेट रहने की सीमा को समझते हुए सही खान-पान और सही समय का ध्यान रखेंगे, तो एसिडिटी की समस्या कभी आड़े नहीं आएगी। थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पिएं, चाय की जगह छाछ या नारियल पानी चुनें और बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से बचें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
19 Oct 2026 07:00 pm