स्वास्थ्य

Antibiotic बिना डॉक्टर की सलाह से खाने के क्या हैं नुकसान? रिसर्च से आया सामने

Antibiotic Resistance: वायरल संक्रमण में भी लोग अपने मन से खा लेते हैं एंटीबायोटिक। हो जाता है बड़ा नुकसान। जानिए रिसर्च क्या कहती है, एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं का गलत इस्तेमाल कैसे बढ़ा रहा है सुपरबग का खतरा।
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Updated: 9 Jun 2026, 2:53 PM IST
Antibiotic Resistance India AMR in India
एंटीबायोटिक की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)

Antibiotic Resistance India: भारत में सिरदर्द, गले में खराश, सर्दी-जुकाम या हल्का बुखार होने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं। खासकर एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin) जैसी दवाओं का इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत भविष्य में एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी का कारण बन सकती है।

हाल ही में प्रकाशित कई रिसर्च और रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि एंटीबायोटिक का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा रहा है। इसका मतलब है कि भविष्य में सामान्य संक्रमणों पर भी एंटीबायोटिक असर करना बंद कर सकती हैं।

क्या कहती है रिसर्च?

BMC Public Health में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में किए गए शोध में पाया गया कि अधिकांश लोगों को यह तक नहीं पता था कि एंटीबायोटिक क्या होती है। कई लोग बिना प्रिस्क्रिप्शन के सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते थे और लक्षण ठीक होते ही दवा बीच में छोड़ देते थे। शोधकर्ताओं ने इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का प्रमुख कारण बताया।

वहीं 2021 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि भारत में एंटीबायोटिक दवाएं अब भी बड़े पैमाने पर ओवर-द-काउंटर (OTC) बेची जा रही हैं। रिसर्चर्स ने कहा कि यह भारत में बढ़ती एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की बड़ी वजहों में से एक है।

एजिथ्रोमाइसिन क्यों नहीं खानी चाहिए अपनी मर्जी से?

सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी अधिकांश बीमारियां वायरस के कारण होती हैं, जबकि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं। ऐसे में वायरल संक्रमण में एजिथ्रोमाइसिन खाने से कोई फायदा नहीं मिलता। उल्टा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया धीरे-धीरे दवा के प्रति प्रतिरोधक बन सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि दुनिया भर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रही है और इसका एक बड़ा कारण एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल है। WHO के अनुसार अब लगभग हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण सामान्य एंटीबायोटिक से प्रभावित नहीं हो रहा।

क्या हो सकते हैं नुकसान?

  • सामान्य संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो सकता है।
  • अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत बढ़ सकती है।
  • इलाज का खर्च कई गुना बढ़ सकता है।
  • गंभीर मामलों में जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
  • भविष्य में प्रभावी एंटीबायोटिक विकल्प कम पड़ सकते हैं।

क्या करें?

किसी भी एंटीबायोटिक का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें। दवा शुरू करने के बाद पूरा कोर्स खत्म करें, भले ही लक्षण पहले ठीक हो जाएं। साथ ही सर्दी, वायरल फीवर या हल्के गले के दर्द में खुद से एंटीबायोटिक लेने से बचें। एंटीबायोटिक आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हैं। यदि इनका इस्तेमाल समझदारी से नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में छोटी-छोटी बीमारियां भी गंभीर और जानलेवा बन सकती हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
9 Jun 2026, 2:53 PM IST
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