स्वास्थ्य

जिस कोविड वैक्सीन को यूरोप ने किया बैन, उसी का भारत में हो रहा है धड़ल्ले से प्रयोग

यूरोपियन रेगुलेटर्स के अनुसार इस वैक्सीन के कारण कुछ लोगों के दिमाग में खून के थक्के बन रहे हैं जो खतरनाक हो सकते हैं, फिर भी कोविड-19 की रोकथाम करने में इस दवा की प्रभावशीलता को देखते हुए इस दवा का प्रयोग सावधानीपूर्वक करने की सिफारिश की गई है।
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Updated: 8 Apr 2021, 8:44 AM IST
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एस्ट्रोजेनका की कोविड-19 वैक्सीन पर दिनोंदिन विवाद बढ़ता जा रहा है। दुनिया के लगभग एक दर्जन से अधिक देशों में इस वैक्सीन पर रोक लग चुकी है और कई अन्य देशों में भी इस वैक्सीन पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। सबसे बड़ी बात, यूरोप के जिन देशों में इस दवा पर रोक लगाई गई है, वहां करोड़ों लोगों को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है। हालांकि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते विश्व के अधिकतर देशों में इस वैक्सीन को लगाने के लिए न्यूनतम उम्र सीमा तय कर दी गई है।

इटली सरकार ने कहा है कि एस्ट्रोजेनका की वैक्सीन को केवल 60 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के लोगों में लगाया जाना चाहिए। वहां पर जिन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है, उन लोगों को दूसरी डोज के लिए सरकार ने अनुमति दे दी है। ब्रिटेन सरकार ने भी 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों को इस वैक्सीन को नहीं लगाने की सलाह दी है।

यूरोपियन रेगुलेटर्स के अनुसार इस वैक्सीन के कारण कुछ लोगों के दिमाग में खून के थक्के बन रहे हैं जो खतरनाक हो सकते हैं, फिर भी कोविड-19 की रोकथाम करने में इस दवा की प्रभावशीलता को देखते हुए इस दवा का प्रयोग सावधानीपूर्वक करने की सिफारिश की गई है। रिसर्च के अनुसार लगभग 10,000 महिलाओं में से चार महिलाओं में खून के थक्के बनने की समस्या देखी गई। ये सभी महिलाएं ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स का प्रयोग कर रही थी। यूरोपियन हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जिन लोगों में वैक्सीन लगाने के अगले 2 हफ्तों में प्लेटलेट्स कम थीं, उन्हीं में खून के थक्के बनने की समस्या देखी गई।

देश में भी दिख रहे हैं वैक्सीन के साईड-इफेक्ट्स
भारत में एस्ट्रोजेनका वैक्सीन का प्रयोग कोविशील्ड के नाम से किया जा रहा है। इस वैक्सीन के यहां भी कुछ दुष्प्रभाव देखने में आ रहे हैं लेकिन वे अस्थाई हैं और कुछ ही दिनों में स्वत: खत्म भी हो रहे हैं। इन साईड-इफेक्ट्स में हल्का बुखार होना, शरीर दर्द होना जैसे लक्षण हैं जिनके लिए डॉक्टर उपयुक्त दवाएं दे रहे हैं। कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद यहां भी कथित रूप से कुछ लोगों की मृत्यु होने की खबरें सामने आई थीं जिनके बारे में बाद में कहा गया कि वे मृत्यु वैक्सीन का दुष्प्रभाव न होकर अन्य किसी कारण से हुई थीं।

भारत में भी खास उम्र सीमा के लोगों को मिल रही है वैक्सीन
भारत में वर्तमान में दो वैक्सीन Covishield और Covaxin का प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि कुछ केसेज को छोड़ दें तो इन दोनों ही वैक्सीन्स में इस तरह का खतरा हाल-फिलहाल भारत में नहीं दिखाई दे रहा है फिर भी वैक्सीन की कम उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने आरंभ में केवल 60 वर्ष से अधिक उम्र सीमा के लोगों के लिए ही वैक्सीन लगाने की सलाह दी थी। कुछ दिन पूर्व इस सीमा को कम कर 45 वर्ष से अधिक आयु सीमा कर दिया गया था, अर्थात 45 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी लोगों को वैक्सीन लगवानी अनिवार्य है। देश के कुछ राज्यों में आयु सीमा को हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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