Autism Symptoms: नई रिसर्च में खुलासा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ऑटिज़्म पहचानना ज्यादा मुश्किल क्यों होता है? जानिए लक्षण, कारण और समय पर पहचान का महत्व।
Autism Symptoms: ऑटिज्म एक ऐसी न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जो व्यक्ति के सोचने, व्यवहार करने और दूसरों से जुड़ने के तरीके को प्रभावित करती है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि ऑटिज्म बच्चों, खासकर लड़कों में ज्यादा देखा जाता है। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि महिलाओं और लड़कियों में भी ऑटिज्म होता है, बस उसे पहचानना ज्यादा मुश्किल होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में ऑटिज्म के लक्षण अक्सर छिपे रह जाते हैं या देर से सामने आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि लड़कियां अपने व्यवहार को समाज के अनुसार ढालने की कोशिश ज्यादा करती हैं। इसे मास्किंग कहा जाता है, यानी अपने असली लक्षणों को छुपाना।
लड़कियों को बचपन से ही सामाजिक व्यवहार सीखने और अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। वे दूसरों को देखकर उनकी नकल कर लेती हैं, जिससे उनकी परेशानी आसानी से नजर नहीं आती। कई बार उनका शांत या कम बोलना शर्मीला स्वभाव समझ लिया जाता है, जबकि असल में यह ऑटिज्म का संकेत हो सकता है। इसी वजह से कई महिलाएं बड़े होने तक बिना सही डायग्नोसिस के जीवन जीती रहती हैं। देर से पहचान होने पर उन्हें मानसिक तनाव, चिंता या डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं:
महिलाओं में ये संकेत हल्के या अलग तरीके से दिख सकते हैं, इसलिए पहचान करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक अलग तरह का न्यूरोलॉजिकल विकास है। लेकिन समय पर पहचान होने से व्यक्ति को सही सपोर्ट, थेरेपी और समझ मिल सकती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर तरीके से जीवन जी पाते हैं। अगर लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो भावनात्मक और सामाजिक कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। इसलिए परिवार और समाज दोनों को जागरूक होना जरूरी है।