AVN Disease: 24 साल के लड़के का हिप रिप्लेसमेंट क्यों करना पड़ा? ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शगुन अग्रवाल से जानें क्या है AVN बीमारी के कारण और कैसे स्टेरॉयड व ज्यादा शराब हड्डियों को नुकसान पहुंचाकर बढ़ा सकते हैं हिप रिप्लेसमेंट का खतरा।
AVN Disease Symptoms: इतनी कम उम्र में हिप रिप्लेसमेंट; आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? 24 साल के एक लड़के का हिप रिप्लेसमेंट होने की खबर सुनकर शायद आपके मन में भी यही सवाल आए। लेकिन अब युवाओं में एक ऐसी बीमारी सामने आ रही है, जो इस हालत तक पहुंचा सकती है। इस बीमारी का नाम है AVN (एवस्कुलर नेक्रोसिस)। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शगुन अग्रवाल के मुताबिक, कई मामलों में ज्यादा शराब पीना और लंबे समय तक स्टेरॉयड लेना इसकी बड़ी वजह बन सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो चलना-फिरना तक मुश्किल हो सकता है।
AVN ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डी तक खून की सप्लाई कम होने लगती है या बंद हो जाती है। यह दिक्कत शरीर के किसी भी जोड़ में हो सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा असर हिप यानी कूल्हे की हड्डी पर देखने को मिलता है। शुरुआत में सिर्फ हल्का दर्द होता है, लेकिन समय के साथ हालत इतनी बिगड़ सकती है कि मरीज को हिप रिप्लेसमेंट करवाना पड़े।
आजकल कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड ले लेते हैं। कोई बॉडी बनाने के लिए, कोई दर्द या एलर्जी में, तो कोई जल्दी रिकवरी के चक्कर में इनका इस्तेमाल करता है। लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा स्टेरॉयड लेने से हड्डियों में ब्लड सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे AVN का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड लेना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
अगर आप सोचते हैं कि शराब सिर्फ लिवर खराब करती है, तो ऐसा नहीं है। इसका असर हड्डियों पर भी पड़ सकता है। ज्यादा शराब पीने से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जो खून के बहाव को प्रभावित कर सकता है। जब हड्डी तक सही तरीके से खून नहीं पहुंचेगा, तो उसके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि ज्यादा शराब पीने वालों में AVN का रिस्क बढ़ जाता है। तंबाकू का सेवन, मोटापा और विटामिन की कमी भी इसका कारण हो सकते है।
NIH के अनुसार, इसके लक्षण और बचाव निम्नलिखित हैं,
अगर AVN का समय रहते पता चल जाए तो दवा, फिजियोथेरेपी और कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट से स्थिति को संभाला जा सकता है। लेकिन अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए और हड्डी खराब होने लगे, तो हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि कम उम्र में लगातार कूल्हे का दर्द, चलने में दिक्कत या अकड़न को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।