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11 साल से दूसरों के सहारे, जटिल हिप जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ने दिया नया जीवन

जयपुर . 11 साल से संगम यादव का चलना तो दूर, बिना सहारे के बिस्तर से उठ पाना भी मुमकिन नहीं था। यहां अस्पताल में आने के बाद उसे दोनों हिप जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी गई।
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जयपुर

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Anil Chauchan

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Updated: 22 Dec 2021, 10:49 AM IST

हिप रिप्लेसमेंट

इस तकनीक के जरिए ट्रांसप्लांट हिप काफी हद तक नेचुरल हिप की तरह काम करता है। इसमें डिस्लोकेशन की आशंका न के बराबर रहती हैं।

जयपुर . 11 साल से संगम यादव का चलना तो दूर, बिना सहारे के बिस्तर से उठ पाना भी मुमकिन नहीं था। अनुवांशिक कारणों से विरासत में मिली एक बीमारी ने उसका जीवन एक बिस्तर तक समेट दिया था और वह बिल्कुल नीरस जीवन जी रही थी। यहां तक कि कई अस्पतालों में परामर्श लेने के बाद भी उसे सिर्फ यही जवाब मिला कि उसे हमेशा के लिए ऐसे ही जीवन गुजारना पड़ेगा।
अनुवांशिक कारणों से मरीज को एंकायलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी थी, जिससे उसके जोड़ों में अत्यधिक जकडऩ थी। सीके बिरला हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आशीष के शर्मा ने बताया कि मरीज के दोनों हिप जॉइंट पूरी तरह जाम हो गए थे। इस कारण उसका अपने आप खड़ा होना, चलना फिरना मुमकिन नहीं था। उसे दैनिक नित्य कर्म एवं अन्य मामूली कार्यों के लिए भी अपने परिजनों का सहारा लेना पड़ता था। लंबे समय तक इस तरह रहने के कारण मरीज काफी डिप्रेशन में भी आ गई थी। यहां अस्पताल में आने के बाद उसे दोनों हिप जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी गई।
मरीज की उम्र 23 वर्ष ही है और इस उम्र में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जानी थी, इसीलिए उसे नई जनरेशन के डेल्टा सेरेमिक जॉइंट्स लगाए गए जो करीब 35-40 साल तक भी चल सकते हैं। डॉ. आशीष ने बताया कि सर्जरी के दौरान जॉइंट की मूवमेंट बनाना और उनका अलायमेंट सटीक लाना काफी चुनौतिपूर्ण कार्य था। जोड़ के आस-पास के टिश्यू भी ठीक किए गए क्योंकि लंबे समय तक अटके हुए जोड़ों के कारण वे भी प्रभावित हो गए थे। कूल्हे के दोनों जोड़ों में बीमारी के कारण सब तरफ से लचीले कैप्सूल ने जोड़ जाम करने वाली हड्डी का स्वरूप ले लिया था, जिसके कारण दोनों जोड़ों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था, जिसे बोनी अंकायलोसिस कहा जाता है।

अंकायलोसिस वाली हड्डियों को अत्यंत जटिल ऑपरेशन से हटाया गया और दोनों कूल्हे के जोड़ों का जटिल सरैमिक जोड़ प्रत्यारोपण किया गया। सर्जरी के बाद उसके दोनों जोड़ों का मूवमेंट सामान्य हो गया और वह बिना सहारे के चलफिर पा रही है। संगम अब ख़ुशी से फूली नहीं समा रही है और अपने सभी कार्य स्वयं कर पा रही है।

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