
Bacteria Treatment: आपने बहुत सारे ऐसे लोगों को देखा होगा जिनको एक बार घाव हो जाएं तो ये घाव जल्दी से भरते नहीं हैं। या फिर जिनको डायबिटीज होता है उनके घाव जल्दी से भरते नहीं हैं। और भी कई ऐसे प्रकार के घाव होते हैं जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं भी असर नहीं करती हैं और ये घाव भरने में बहुत लंबा समय ले लेते हैं। कई बार तो स्थिति इतनी भयावह होती है कि व्यक्ति की मौत का कारण ही ये घाव बन जाते हैं।
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक खोज निकाली है जिससे कोई भी घाव कितना भी पुराना क्यों न हो, अब उसका इलाज किया जा सकेगा। इस तकनीक में घाव बनाने वाले बैक्टीरिया को मारने की जगह उसी बैक्टीरिया की ऊर्जा, यानी सीधी भाषा में कहें तो बिजली को काटने का काम किया जाएगा, जिससे बैक्टीरिया आगे बढ़ेगा ही नहीं और घाव जल्दी भर जाएगा।
आज विज्ञान ने अपने क्षेत्र में इतनी प्रगति कर ली है, लेकिन कई ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर दवाएं भी बेअसर हो जाती हैं। इन्हीं को 'सुपरबग' कहा जाता है और कहीं न कहीं इनकी वजह से ही हल्का सा घाव भी कई बार लंबे समय तक ठीक नहीं होता है। लेकिन अभी Phys.org पर प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अब वैज्ञानिकों ने जो तकनीक बनाई है, उसमें बैक्टीरिया को सीधे शॉक देने के बजाय उसकी ऊर्जा खत्म करने पर जोर दिया है, जिससे घाव कितना भी पुराना और बड़ा क्यों न हो, बैक्टीरिया का मरना निश्चित होता है। इस तकनीक को 'एक्स्ट्रासेल्यूलर इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट (EET) न्यूट्रलाइजेशन' कहा जाता है।
यह तकनीक बिल्कुल बिजली के पावर कट की तरह काम करती है। जैसे ही 'न्यूट्रलाइजिंग एजेंट' को घाव पर लगाया जाता है, यह वहां के इलेक्ट्रॉन्स ट्रांसपोर्ट को रोक देती है। इससे बैक्टीरिया आगे बढ़ ही नहीं सकता। इसके कारण बैक्टीरिया अपना सुरक्षा कवच (बायोफिल्म) नहीं बना पाता, जो दवाओं को बैक्टीरिया तक पहुँचने से रोकता है। जब यह कवच नहीं रहेगा, तो अपने आप ही घाव ठीक हो जाएगा।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।