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Six Pack Abs After 40: शेखर सुमन ने ढलती उम्र में बनाए थे सिक्स-पैक एब्स, जानें 45-50 की उम्र में इसके लिए क्या रखना है ध्यान

Six Pack Abs After 40: सिर्फ क्रंचेस करने से नहीं बनते सिक्स-पैक एब्स! जानिए मेडल रिसर्च और एक्सपर्ट्स के अनुसार जेनेटिक्स का असली रोल और ढलती उम्र में सुरक्षित तरीके से फैट बर्न करने के 4 वैज्ञानिक नियम।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 15, 2026

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शेखर सुमन ने 40 की उम्र में बनाए सिक्स-पैक एब्स- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- @instasekhusuman)

Six Pack Abs After 40: एक्टर, कॉमेडियन शेखर सुमन आज कल एक बार फिर अपने शो 'शेखर टुनाइट' को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। 66 साल के सुमन अपनी फ़िटनेस को लेकर भी सुर्खियों में रहते हैं। 2010-11 में जब वह करीब 50 साल के थे तब उन्होंने सिक्स-पैक एब्स बनाए थे। उन दिनों यह आम बात नहीं थी।

सुमन ने हाल में 'कर्ली टेल्स' से बातचीत में उन दिनों को याद किया और बताया कि उनके सिक्स पैक एब्स बनाने पर शाहरुख खान, ऋतिक रोशन जैसे सितारे भी हैरान हो गए थे और पूछने लगे थे कि इस उम्र में ऐसा कैसे किया?

जब फिटनेस और सिक्स-पैक एब्स बनाने की बात आती है, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ 20 या 25 साल के युवाओं के बस की बात है। लेकिन बॉलीवुड एक्टर शेखर सुमन ने ढलती उम्र में जो मस्कुलर बॉडी और एब्स बनाए थे, उसने शाहरुख खान और ऋतिक रोशन जैसे सितारों को हैरान कर दिया था। क्या बढ़ती उम्र में ऐसी फिटनेस पाना सुरक्षित है? और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, आइए समझते हैं।

क्या वाकई 40 या 50 की उम्र में एब्स बन सकते हैं?

हां, यह बिल्कुल मुमकिन है और शेखर सुमन जैसे सितारों ने यह साबित भी किया है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और मांसपेशियां कम होने लगती हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन और एजिंग (Aging) पर हुई कई वैज्ञानिक स्टडीज बताती हैं कि सही रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट ट्रेनिंग) और प्रोटीन डाइट की मदद से उम्र बढ़ने के बाद भी मसल प्रोटीन सिंथेसिस (मांसपेशियों के बनने की प्रक्रिया) को तेज किया जा सकता है। बस ध्यान रहे कि इस उम्र में बिना डॉक्टर और प्रोफेशनल ट्रेनर की सलाह के कोई शॉर्टकट या भारी वर्कआउट शुरू न करें।

एब्स बनाने में जेनेटिक्स (Genetics) का रोल

क्या आप जानते हैं कि हर इंसान के सिक्स-पैक एब्स नहीं बन सकते? किसी के 4-पैक होते हैं, किसी के 6, तो किसी के 8 पैक भी होते हैं। यह सब हमारे जेनेटिक्स (जींस) पर निर्भर करता है। मिडियम की रिसर्च बताती है कि पेट की मांसपेशियों को आपस में जोड़ने वाले बैंड्स की बनावट जन्मजात होती है। इसे आप एक्सरसाइज से बदल नहीं सकते। आपका शरीर फैट (चर्बी) कहां जमा करेगा और वर्कआउट के दौरान कहां से पहले घटाएगा, यह आपके माता-पिता से मिले जींस ही तय करते हैं। इसलिए, सिर्फ जिम जाकर किसी सेलिब्रिटी जैसे हूबहू एब्स की उम्मीद करना सही नहीं है।

सिर्फ क्रंचेस करने से एब्स नहीं बनते!

जर्नल ऑफ स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग रिसर्च (Journal of Strength and Conditioning Research PubMed) में छपी एक प्रसिद्ध स्टडी के अनुसार, जो लोग हफ्तों तक सिर्फ पेट की एक्सरसाइज करते रहे, उनके पेट की चर्बी में कोई खास कमी नहीं देखी गई। सिर्फ पेट की कसरत करने से पेट की मांसपेशियां तो मजबूत होंगी, लेकिन उनके ऊपर जमी चर्बी की परत तब तक नहीं हटेगी जब तक आप पूरे शरीर का फैट प्रतिशत (Body Fat Percentage) कम नहीं करते।

एब्स पाने के 4 वैज्ञानिक नियम

Healthline के अनुसार, अगर आप वाकई फिट होना चाहते हैं और एब्स देखना चाहते हैं, तो इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं;

1 कैलोरी डेफिसिट (Calorie Deficit)- रिसर्च बताती है कि आपको दिनभर में जितनी कैलोरी की जरूरत है, उससे थोड़ा कम खाएं ताकि शरीर जमी हुई चर्बी का इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में करे।

2. HIIT वर्कआउट (High-Intensity Interval Training)- स्टडीज के अनुसार, साधारण कार्डियो के मुकाबले HIIT वर्कआउट पूरे शरीर की चर्बी को बहुत तेजी से घटाता है और दिल की सेहत को भी दुरुस्त रखता है।

3. हाई-प्रोटीन डाइट (High-Protein Diet)- न्यूट्रिशन रिसर्च के मुताबिक, प्रोटीन (अंडा, दालें, पनीर, चिकन) खाने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं और पेट लंबे समय तक भरा रहता है।

4. पूरी बॉडी का वर्कआउट (Core & Strength Training)- सिर्फ पेट नहीं, बल्कि कंपाउंड मूवमेंट्स (जैसे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट) करें। जितनी बड़ी मांसपेशियां एक्टिव होंगी, शरीर उतनी ही तेजी से फैट बर्न करेगा।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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